बताया जा रहा है कि जेल में बंदियों से मुलाकात के लिए आने वाले उनके परिजनों और करीबियों के हाथ में जो मुहर लगाई जाती है, वही मुहर राजू ने न जाने कैसे अपने हाथ में लगवा ली थी। दूसरे पहर के मुलाकाती जब जेल से बाहर जाने लगे तो उन्हीं की भीड़ में शामिल होकर जेल कर्मियों को चकमा देते हुए वह बाहर निकल गया। अब इस बात की जांच की जा रही है कि जेल में मुलाकातियों के हाथ पर लगने वाली मुहर बैरक तक कैसे पहुंची।
वाराणसी जिला जेल (फाइल)
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जेल से बाहर निकलने के दौरान भी गणना होती है। एक-एक मुलाकाती के नाम, पता का मिलान किया जाता है। इसके बावजूद लापरवाही का बड़ा मामला सामने आ गया। जेल प्रशासन की तहरीर के आधार पर राजू के खिलाफ लालपुर पांडेयपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस संबंध में जिला जेल के जेलर वीरेंद्र त्रिवेदी ने बताया कि बंदी मुलाकातियों की भीड़ के साथ भागा है। घटना की जांच कराई जा रही है। जिस किसी की लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
जेल से बाहर निकल कर वह पॉक्सो एक्ट का मुकदमा दर्ज कराने वाली पीड़िता के घर गया और उसे केस वापस लेने के लिए धमकाया। पीड़िता ने जब इस संबंध में अर्दली बाजार चौकी की पुलिस को सूचना दी तो राजू के जेल से फरार होने का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस ने राजू के संबंध में जेल प्रशासन से पूछा तो कोई कुछ बता पाने की स्थिति में ही नहीं था। इसके बाद लालपुर पांडेयपुर थाने की पुलिस हरकत में आई और राजू की तलाश शुरू की। मामला कमिश्नरेट के अफसरों के संज्ञान में आया तो राजू की तलाश में तीन थानों की पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच को लगा दिया गया।