तयाल की मौत की सूचना से कार्यालय में माहौल गमगीन हो गया। उनके साथ काम करने वाले सेवानिवृत्त इंजीनियर भी कार्यालय पहुंचे और उनके बारे में पूछने लगे। थोड़ी देर बाद कार्यालय में शोकसभा हुई और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
रिटायरमेंट पर विदाई समारोह की थी योजना :
रुंधे गले से कार्यालय के कर्मचारी शिवशंकर कन्नौजिया ने कहा कि वे मिलनसार और मृदुभाषी थे। किसी को डांटते नहीं देखा। किसी से तेज आवाज में बात भी नहीं करते थे। हर किसी से हालचाल पूछते थे। हम लोगों ने रिटायरमेंट पर विदाई समारोह की योजना बनाई थी, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। पता नहीं था कि ऐसी विदाई देनी पड़ेगी।
इस बार मंगल को साथ नहीं ले गए :
कार्यालय के लोगों ने बताया कि महाप्रबंधक जब कभी बाहर जाते थे तो वे अपने नौकर मंगल को साथ ले जाते थे। इस बार वे मंगल को लेकर नहीं गए। जब मंगल को हादसे की सूचना मिली तो वह भी मोहनलालगंज चला गया।
धार्मिक किताबें पढ़ने के शौकीन थे जीएम :
कार्यालय के जिस कमरे में एसके तयाल बैठते थे, उसमें ताला लगा था। लोगों ने कमरा खोला तो उसमें खाली कुर्सी के अलावा फाइलों के ढेर थे। ऊपर महाकवि कालिदास की पुस्तक कुमार संभवम् रखी थी। कार्यालय के लोगों ने बताया कि धार्मिक किताबें पढ़ने में उनकी रुचि थी। वह कोई काम पेंडिंग नहीं रखते थे। वह इंजीनियरों से भी कहते थे कि समय सीमा और गुणवत्ता का ध्यान रखा करो।
घटना के एक दिन पहले बाजार गई थी जीएम की पत्नी संगीता :
कृष्णाराज कालोनी पहड़िया स्थित आवास के प्रथम तल पर जिस कमरे में जीएम पत्नी के साथ रहते थे, उसमें ताला लगा था। मकान मालकिन पूनम तिवारी ने बताया कि वे लोग मूलरूप से बरेली के रहने वाले थे, लेकिन उनका पूरा परिवार लखनऊ के इंदिरा नगर में रहता है। उनके भैया-भाभी सूरत में रहते हैं। उनके भाई ओएनजीसी में इंजीनियर हैं। रविवार रात घरेलू सामान खरीदने संगीता बाजार गई थी। छह महीना पहले ही वे किराए पर यहां रहने आए थे।