वाराणसी। ये तो प्रेम की बात है उद्धव, बंदगी तेरे बस की नहीं...की मधुर धुन पर नाटी इमली स्थित कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भक्ति रस से भावविभोर हो उठे। श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग की मार्मिक नृत्य नाटिका ने मित्रता, भक्ति और प्रेम के प्रसंगों को जीवंत किया। इस दौरान भरत मिलाप मैदान में भागवत कथा के आठवें दिन बालव्यास श्रीकांत शर्मा ने कहा कि हमें ईश्वर से मांगना ही नहीं आता है। वो हमें अनंत देना चाहता हैं और हम उससे छोटी-छोटी चीजें मांगते रह जाते हैं। बस एक बार स्वयं को प्रभु के लिए अर्पित करके देखो, भगवान आपको स्वयं नहीं छोड़ेंगे।
श्रीकृष्ण-सुदामा के प्रसंग सुनाते हुए बालव्यास ने कहा कि सुदामा से धनी तो कोई था ही नहीं, जिसका नाम स्वयं भगवान श्रीकृष्ण रटते रहे। श्रीकृष्ण को किसी चीज की आवश्यकता नहीं है। उनके पास महल हैं, हर सुख सुविधा है, लेकिन नहीं है तो गोपियों का प्रेम, ग्वालों का साथ और राधा का सामीप्य। इन तीनों के बिना श्रीकृष्ण का हर क्षण कष्ट में बीतता रहा। श्रीकृष्ण ने जब ब्रज का हाल लेने के लिए उद्धव को भेजा तो वह ब्रज के प्रेम को देखकर वहीं के होकर रह गए। वृंदावन से विदा लेते समय गोपियों के ज्ञान और वैराग्य से प्रभावित होकर उद्धव उनके चरणों में नतमस्तक हो गए।
श्रीकृष्ण की भूमिका में अभिनव रुंगटा एवं सुदामा की भूमिका राम गोपाल सर्राफ ने निभाई। कथा में महावीर प्रसाद रूंगटा, उर्मिला देवी रूंगटा, कमलेश बाजोरिया, अवधेश खेमका, गोपाल अग्रवाल, सुरेश तुलस्यान, मनीष गिनोडिया, अजय खेमका, पंकज तोदी, अर्जुन रतेरिया, विजय मोदी, अनूप पोद्दार, प्रकाश थाणेवाला, राजेश धानुका, रोहित सरावगी, मोहित अरोड़ा, रामश्याम बबूना आदि ने आरती उतारी।
मंच संचालन महेश चौधरी एवं संयोजन कृष्ण कुमार काबरा ने किया। मारवाड़ी युवा मंच काशी के रोशन अग्रवाल, देवांशु केडिया, संतोष अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, छोटे लाल अग्रवाल आदि ने कथा के पूर्व बालव्यास का राजस्थानी पगड़ी पहनाकर अभिनंदन किया।