तैरकर पार कर लेती हैं गंगा नदी
मूलरूप से सीखड़, मिर्जापुर की रहने वाली तामसी का सफर खेतों में दौड़ने से शुरू हुआ। बताया कि रात में दो बजे दौड़ने निकल जाती थी और सुबह होने से पहले वापस आकर सो जाती थी। किसी तरह परिवार वालों को मनाकर 2017 में घर से बाहर खेलने निकली।
स्कूल, ब्लॉक, मंडल तक प्रथम स्थान मिला। हालांकि, लखनऊ में हुई राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में अंतिम पायदान पर रही। खूब हताशा हुई और गुस्सा भी आया, लेकिन जीत का जुनून सवार हो गया। दोपहर में ही दौड़ने निकल जाती थी। पैर दर्द करने पर गर्म पानी से सेकाई करती थी। तैरकर गंगा पार कर लेती थी। उस पार रेती पर जाकर तरबूज खाती थी।
बताया कि उन्हें चना बहुत पसंद है। जब भी गांव जाती थीं चना लेकर आती थीं। वाराणसी आने पर पहली बार सिगरा स्टेडियम देखा। एक फुटबॉल खिलाड़ी से मिली तो उन्होंने एथलेटिक्स कोच चंद्रभान यादव से मिलवाया, उन्होंने काफी मदद की। स्टेडियम के बाहर एक दुकान से रोज दो केले और जूस का प्रबंध किया। इसके बाद जूनियर होने के बावजूद सीनियर वर्ग में प्रतिभाग करने लगी। पता चला कि मैराथन खेलने पर पैसे मिलते हैं।
काफी संघर्षपूर्ण रहा है तामसी सिंह का जीवन।
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जीत के पैसों से खरीदे जूते, घर वालों के लिए कपड़े
तामसी ने बताया कि नेहरू स्टेडियम में जीत के बाद पैसे मिले तो खुद के लिए जूते और घर वालों के लिए कपड़े खरीदे। एक सप्ताह बाद रांची में 21 किलोमीटर दौड़ में दूसरा स्थान हासिल किया। फिर एक लाख रुपये मिले। इसके बाद रानीखेत आ गई। टाटा नगर में 10 किलोमीटर में पहला स्थान मिला।
51 हजार रुपये और 50 हजार का गिफ्ट बाउचर मिला। पता नहीं था कि बाउचर क्या होता है। ऐसे में जानने वाले सामान लेकर उन्हें पैसे दे देते थे। गुजरात में सीनियर वर्ग में नेशनल खेला। जीतने पर एक लाख ग्यारह हजार रुपये मिले। 2020 में लॉकडाउन लग गया।
उत्तराखंड में बाहर रहना और खाना महंगा था। वाराणसी लौट आई। एथलीट रानी यादव के साथ बरेका में अभ्यास करने लगी। पुलिस से बचते बचाते सुबह चार बजे दौड़ने जाती थी।
2017 में जीती साइकिल, डर से घर नहीं लाई
तामसी ने बताया कि 2017 में बरेका में दौड़ प्रतियोगिता में पहला स्थान जीता था। इनाम में एक साइकिल और 1500 रुपये मिले थे। घर वालों की डर से साइकिल घर लेकर नहीं ले गई। सहेली को साइकिल और 500 रुपये भी दिए। तीन दिन तक किसी को नहीं बताया, बाद में नहीं रहा गया तो परिजनों को बताया। घर वाले नाराज हुए, लेकिन बाद में मान गए। साथ ही साइकिल घर लाने की अनुमति दी। हमेशा प्रतियोगिताओं में बेस्ट थ्री में ही रहती थी।