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खेल दिवस: घास के मैदान से एस्ट्रोटर्फ तक, मऊ ने गढ़ी हॉकी की नई पहचान; 35 वर्षों का है ये सफर

Sat, 29 Aug 2026 02:14 PM IST
Aman Vishwakarma पुनीत श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, मऊ।

सार

मऊ ने पिछले 35 वर्षों में हॉकी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले से पांच खिलाड़ियों ने भारतीय हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व किया। घास के मैदान से शुरू हुआ सफर अब एस्ट्रोटर्फ तक पहुंच चुका है। जिले के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करने के साथ सरकारी नौकरियां हासिल कर सफलता की नई कहानी लिखी है।
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जिला स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ मैदान पर प्रैक्टिस मैच खेलते खिलाड़ी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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कभी रेलवे स्टेडियम के साधारण घास के मैदान से हॉकी की शुरुआत करने वाला मऊ आज अत्याधुनिक एस्ट्रोटर्फ मैदान तक पहुंच चुका है। बीते 35 वर्षों में जिले में हॉकी ने न केवल अपना मैदान बदला, बल्कि खिलाड़ियों की पहचान भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाई। मऊ की मिट्टी से निकले पांच खिलाड़ियों ने भारतीय हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व कर देश और जिले का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि घास से लेकर एस्ट्रोटर्फ तक का सफर तय करने वाले इन खिलाड़ियों के लिए हॉकी खेल रोजगार की राह भी खोलती रही है।

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भारतीय सीनियर टीम की सदस्य रह चुकीं पूनम सिंह ने वर्ष 2005 में देश का प्रतिनिधित्व किया। वह वर्तमान में बरेली में रेलवे कार्यालय अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 2011 में भारतीय सीनियर टीम का हिस्सा रहीं रश्मि सिंह अब पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल में टीटीई हैं।

वर्ष 2013 के हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम की सदस्य रहीं निशा वर्तमान में पश्चिम रेलवे, मुंबई में कार्यरत हैं। वहीं एशिया कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे सुनील यादव इंडियन ऑयल, लखनऊ में सेवाएं दे रहे हैं। मजहर कमाल भी पाकिस्तान दौरे पर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और वर्तमान में डीएलडब्ल्यू, वाराणसी में कार्यरत हैं।
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मऊ की हॉकी यात्रा इस बात की मिसाल है कि बेहतर मैदान, अवसर और प्रतिभा का साथ मिले तो छोटे शहरों से भी राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं। घास के मैदान से शुरू हुई यह कहानी अब एस्ट्रोटर्फ तक पहुंच चुकी है और आने वाली पीढ़ी के लिए उम्मीद का नया मैदान तैयार कर रही है।

ओमेंद्र सिंह। - फोटो : संवाद
ओमेंद्र सिंह 35 साल से दे रहे हैं निशुल्क सेवा
बिजली निगम में कार्यरत शहर के बकवल निवासी ओमेंद्र सिंह 35 साल से निशुल्क सेवा दे रहे हैं। ओमेंद्र सिंह वर्तमान समय में भी प्रतिदिन सुबह और शाम जिला स्टेडियम जाकर खिलाड़ियों को अभ्यास कराते हैं। इनके द्वारा प्रशिक्षित खिलाड़ी आज स्टेडियम में कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमें आशा है कि आने वाले दिनों में मऊ जिले का खिलाड़ी ओलंपिक में खेलेगा, जिसके लिए निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

सुनील यादव, मजहर कमाल, निशा और रश्मि सिंह। - फोटो : संवाद
इन विभागों में सेवाएं दे रहे हैं खिलाड़ी
इस मैदान से निकले सैकड़ों खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत के बल पर सरकारी और निजी क्षेत्रों में नौकरियां हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। जिले के महिला और पुरुष हॉकी खिलाड़ी भारतीय रेलवे, भारतीय सेना (इंडियन आर्मी), उत्तर प्रदेश पुलिस, आयकर विभाग, इंडियन ऑयल, आबकारी (एक्साइज), पावर कॉरपोरेशन, खेल विभाग और शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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एस्ट्रोटर्फ मैदान पर मिल रही प्रोफेशनल ट्रेनिंग
मऊ। डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में 14 करोड़ रुपये की लागत से खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण देने के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान बनाया गया है, जहां लगातार खिलाड़ियों को प्रोफेशनल ट्रेनिंग मिल रही है। अत्याधुनिक मैदान उपलब्ध होने से युवाओं को अब शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर का माहौल और प्रशिक्षण मिल रहा है, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए सीधे तैयार हो रहे हैं।
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