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खेल दिवस 2021: काशी की इन बेटियों ने लहराया परचम, त्याग और समर्पण के दम पर किया हर मैदान फतह

Sun, 29 Aug 2021 01:18 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

बनारस के खिलाड़ियों में भी ऐसे बहुत से खिलाड़ी हैं, जिन्होंने तमाम मुश्किलों और चुनौतियों के बाद भी अपना लक्ष्य हासिल किया।
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बरखा सोनकर, स्वाति सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हर सफलता के पीछे कोई न कोई कहानी और शख्स जरूर होती है। संघर्षों की पथरीली राह से गुजर कर सफलता की फूलों भरी राह मिलती है। बनारस के खिलाड़ियों में भी ऐसे बहुत से खिलाड़ी हैं, जिन्होंने तमाम मुश्किलों और चुनौतियों के बाद भी अपना लक्ष्य हासिल किया और बनारस ही नहीं देश का नाम भी रोशन किया। 

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मां के गहने गिरवी रखकर पाई सफलता
भोजूबीर निवासी अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी बरखा सोनकर बचपन से ही यूपी कॉलेज के खेल मैदान में अपने हुनर को निखारती रहीं। जिला और मंडल स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए पिता भोलानाथ सहयोग करते। लेकिन जब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दमखम दिखाने का मौका मिला तो स्कूटर मेकेनिक पिता के सामने आर्थिक संकट सामने आ गया। इसके बावजूद मां ने गहने गिरवी रखकर बेटी बरखा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए बाहर भेजा। बरखा इन दिनों बंगलूरू में भारतीय महिला बास्केटबॉल टीम के शिविर में तैयारी कर रही हैं।

बरखा ने आठ बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। पहली बार 2011 में चीन में आयोजित फीबा के अंडर 16 एशियन वूमन बास्केटबाल चैंपियनशिप और 2012 में रूस में आयोजित चिल्ड्रन एशियन इंटरनेशनल स्पोर्ट्स गेम्स में हिस्सा लिया। 2014 में जॉर्डन के अमान में आयोजित फीबा के अंडर 18 एशियन वूमन बास्केटबाल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। 2017 में बंगलूरू में हुए फीबा के एशियन वूमन चैंपियनशिप में विजेता रहीं। 2019 के फीबा के एशियन वूमन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था।

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वर्षा। - फोटो : अमर उजाला
भाला फेंक में अभ्यास के लिए रोज 20 किमी साइकिल चलाती हैं वर्षा
अभी हाल ही में पहली बार आयोजित अंडर-23 यूपी एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 41 मीटर भाला फेंक कर रजत पदक जीतने वाली लठिया निवासी वर्षा वर्मा इनदिनों 20 किलोमीटर रोजाना साइकिल चलाकर बीएचयू के साई सेंटर में अभ्यास करने आती हैं। 2014 से जैवलिन थ्रो की शुरुआत करते हुए सात बार नेशनल मेडल जीत चुकी वर्षा बताती हैं इन दिनों हॉस्टल बंद होने से रोज अभ्यास के लिए साइकिल से आना जाना पड़ता है। नौ बार के नेशनल प्रतियोगिता में दमखम दिखाने वाली चार बहनों में सबसे छोटी वर्षा आगामी राष्ट्रीय और विश्व एथलेटिक्स चैंपियन की तैयारी कर रही हैं। सिलाई का काम करने वाले पिता अनिल कुमार वर्मा बेटी की हर जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। 
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परिवार और पड़ोसियों के ताने के बाद लोहा उठाकर लोहा मनवाया
जिमनास्टिक से वेटलिफ्टिंग में जोर आजमाइश करने वाली कतुआपुरा निवासी वेटलिफ्टर स्वाति सिंह बताती हैं कि जब उन्होंने 2005 में जिमनास्टिक छोड़ वेटलिफ्टिंग में जोर आजमाइश शुरू की तो परिवार और आस पड़ोस के लोगों ने ताने मारे कि लड़की होकर लोहा उठाने का खेल खेलती है। इसके बावजूद स्वाति सिंह ने लोगों बातों को अनसुना करके संघर्ष किया 10 बार से अधिक राष्ट्रीय प्रतियोगिता, छह बार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट और दो बार कॉमनवेल्थ में प्रतिभाग करते पदक जीतकर आलोचकों का मुंह बंद कर दिया। फिलहाल स्वाति पटियाला में कॉमनवेल्थ 2022 की तैयारी कर रही हैं।
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