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खेल दिवस 2021: भविष्य में खेल की राजधानी बनेगी काशी, विदेशी खेलों में भी दम दिखा रहे देसी खिलाड़ी

Sun, 29 Aug 2021 12:59 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

ओलंपिक, एशियन और विश्व स्तर के खेलों के लिए यहां खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं।
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नागेंद्र, छोटेलाल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हॉकी, क्रिकेट, कुश्ती, एथलेटिक्स जैसे खेलों के अलावा बनारस में विदेशी खेल नेटबाल, फिस्टबाल, पिंचक सिलाट, कुंगफू, कराटे, कुराश, वूशु, ताइक्वांडो भी खिलाड़ियों के लिए विकल्प के रूप में उभरे हैं। विदेशी खेलों में देशी खिलाड़ी अपना दमखम दिखाते हुए पदक भी जीत रहे हैं। विदेशी खेलों खेलों के प्रति खिलाड़ियों का रुझान भी तेजी से बढ़ रहा है।

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प्रशिक्षक और पूर्व खिलाड़ी कहते हैं कि जितना उत्साह हॉकी, कुश्ती, एथलेटिक्स, मुक्केबाजी जैसे ओलंपिक स्तर के खेलों का है, उतना ही मार्शल आर्ट, वालीबाल, बास्केटबाल, फुटबाल, वुशू जैसे कई विदेशी खेलों भी है। प्रतिभावान खिलाड़ियों प्रचलित खेलों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर प्रदर्शन का मौका नहीं मिल पाता खिलाड़ी को विकल्प के रूप में विदेशी खेलों का सहारा लेना पड़ता है।

कई खिलाड़ी विदेशी खेलों में एशियन, सैफ गेम, कामनवेल्थ और विश्व स्तर के खेलों में काशी का परचम लहरा चुके हैं। जिसमें वूशु खिलाड़ी सूरज यादव, जूडो खिलाड़ी विजय यादव, ताइक्वांडो खिलाड़ी अश्विनी सिंह हैं। खेलों की संख्या इनके प्रति खिलाड़ियों का रूझान और खेल सुविधाओं में सुधार से भविष्य में बनारस खेलों की राजधानी के तौर पर भी विकसित हो सकता है। विदेशी खेलों के प्रति खिलाड़ियों का रुझान से खेलों की विविधताएं ढेर सारे अवसर देंगी। यह खिलाड़ी साउथ एशियन गेम्स, विश्व जूडो चैंपियनशिप और अंतरराष्ट्रीय पूमसे प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके हैं।

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अशोक पांडेय सत्यवर्धन। - फोटो : अमर उजाला
कुराश के 100 से ज्यादा खिलाड़ी
उजबेकिस्तान के प्राचीन खेल कुराश के लिए काशी में भूमिका बना चुके अजीत पाल बताते हैं, काशी में कुराश के करीब 100 खिलाड़ी हैं। इसमें 10 खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया है। हाल ही में यूपी ओलंपिक संघ की की ओर मान्यता मिलने के बाद खेल को लेकर खिलाड़ियों में काफी उत्साह है।

फिस्टबाल में भी हैं संभावनाएं
वालीबाल से मिलते जुलते यूरोपियन खेल फिस्टबॉल के कोच गोविंद कहते हैं, बनारस में इस खेल की शुरुआत पिछले साल हुई थी। विश्व स्तर तक फिस्टबॉल में प्रतियोगिताएं होती है। बनारस में एक दर्जन राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। हालांकि खेल से जुडे़ संसाधन और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन की कमी है, लेकिन इसके बावजूद खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
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आत्मरक्षा से जुड़े खेलों के प्रति बढ़ा रुझान
आत्मरक्षा का गुर सिखाने बाले मार्शल आर्ट प्रशिक्षक अजीत श्रीवास्तव का कहना है कि काशी में पिंचक सिलाट, कुंगफू, कराटे, वूशु, ताइक्वांडो, जूडो जैसे आत्मरक्षा से जुडे़ खेलों में बेटियों का रुझान बढ़ा है। खेलों को कई संगठनों का सहयोग मिलने से खिलाड़ियों का उत्साह भी बढ़ा है। मार्शल आर्ट के प्रशिक्षकों की कमी भी शहर में नहीं है। शहर से गांव तक में खिलाड़ियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाए जा रहे हैं।

सुरक्षित खेल मैदान और संसाधन समय पर मिले तो किसी भी खेल की प्रतिभा को निखरने में समय नहीं लगता। खेलों को बढ़ावा देने के लिए जमीनी स्तर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए सेंटर खुल भी रहे हैं। - अशोक कुमार पांडेय, एथलेटिक्स, कोच

खेल को लेकर देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का सहयोग जिस तरह से इस साल हुआ है, आगे भी ऐसे ही रहा तो आने वाले दिनों काशी खेल की राजधानी हो जाएगी। खिलाड़ियों की प्रतिभा में निखार आएगा। - सत्यवर्धन सिंह, पूर्व ताइक्वांडो खिलाड़ी

काशी में कई खेलो की संभावनाएं बढ़ी है। पहले हॉकी के लिए शिवपुर सिगरा स्टेडियम, जेपी मेहता कालेज और यूपी कॉलेज के मैदान ही अभ्यास के लिए थे। अब गांव गांव में खिलाड़ियों प्रशिक्षण मिल रहा है। - नागेंद्र सिंह, पूर्व हॉकी खिलाड़ी

काशी में प्रतिभाएं तो बहुत हैं, लेकिन प्रशिक्षकों के सम्मान और उनकी जरूरतों पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। खेलों की संख्या जितनी हैं, काशी में उतने कोच नहीं हैं। जिस पर सरकारों को ध्यान देने की जरूरत है। - छोटेलाल, कोच मुक्केबाजी
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