रात को ढाई बजे सोनी माउंट लिट्रा स्कूल की बस से घर पहुंची तो बीबी हटिया मुहल्ला जश्न मनाते हुए जाग रहा था। गलियों में प्यार भरी सीटियों के शोर और जोशीले अंदाज में बधाइयों का सिलसिला हर-हर महादेव के जयघोष के साथ चल पड़ा। वैसे तो विश्व रिकार्ड बनने की जानकारी मिलते ही सोनी के दरवाजे पर नगाड़ा बजने लगा था। तमाम लोग टेंपो रिजर्व कर माउंट लिट्रा पहुंच गए थे।
लेकिन मां मधु चौरसिया और पिता श्याम चंद्र चौरसिया, भाई अनूप, पवन, बहन माया के घर आने पर जश्न का रंग गाढ़ा हो गया। खुशी की रात जागते हुए कट गई। सुबह आठ बजे श्याम चंद्र के आंगन में पड़ोसी ढोल-नगाड़े पर लोग थिरकने लगे। इसी दौरान सोनी की नींद भी नगाड़ों की थाप से खुल गई। वह तैयार होकर पहली मंजिल के अपने कमरे से बाहर निकली तो स्वागत करने वालों का उत्साह कई गुना बढ़ गया।
फिर क्या था मुहल्ले वालों के साथ सोनी और सोनी के साथ पूरा मुहल्ला नाचने लगा। लोगों को फिक्र थी कि पांच दिन-पांच रात लगातार नाचने के बाद सोनी थक गई होगी। चिकित्सकों ने आराम की सलाह दी होगी लेकिन उसने अपने जज्बे को कुछ घंटे बाद ही दोबारा थिरकन के जोश में उतार दिया। घर पर बधाई देने वालों का तांता देर श्ााम तक लगा रहा।