बीएचयू के मुख्य गेट पर छेड़खानी के विरोध में छात्राओं के नेतृत्वविहीन और सर्वदलीय आंदोलन का असर हुआ है। छात्राओं के समर्थन में बनारस से नई दिल्ली तक बुलंद हुई आवाज के कारण बड़े पैमाने पर फेरबदल और उलटफेर हुआ है।
विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार महिला चीफ प्रॉक्टर तैनात की गईं हैं। यही नहीं, महिला छात्रावासों में पहली बार महिला सुरक्षाकर्मी भी तैनात की जाएंगी। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सिक्योरिटी गार्ड्स की खाकी वर्दी बदलने की पांच दशक पुरानी मांग भी पूरी हो गई है।
बड़ी उपलब्धि यह रही कि छात्राओं को परिसर में जिन समस्याओं से जूझना पड़ता है, उनके बारे में अरसे बाद महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, मंडलायुक्त और मजिस्ट्रेट के सामने नि:संकोच अपनी बात बताने का अवसर मिला।
न्यायिक आयोग में उन्हें अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। 21 सितंबर की रात बीएचयू परिसर में छात्रा के साथ छेड़खानी की वारदात के बाद विश्वविद्यालय की छात्राओं ने 22 सितंबर की सुबह छह बजे से आंदोलन शुरू किया।
आंदोलन का न कोई नेता था और न कोई राजनीतिक विचारधारा हावी थी। मुद्दा सिर्फ एक था, छात्राओं के लिए परिसर पूरी तरह सुरक्षित हो। छात्राओं की सुरक्षा संबंधी मांगों पर उनके समर्थन में विश्वविद्यालय के छात्र भी आए।
23 सितंबर की रात मनमाने तरीके से बीएचयू वीसी लॉज के सामने और फिर महिला महाविद्यालय के सामने सिक्योरिटी गार्ड्स और पुलिस ने छात्राओं-छात्रों और पत्रकारों को लाठियों से पीटा।
प्रकरण सुर्खियों में आया तो पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक ने भी गंभीर रुख अख्तियार किया।