Varanasi News: संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वर्ष 2014 में सेना के ईएमई कोर में भर्ती हुए थे। घटना के बाद से मृतक सैनिक का शव जब पहुंचा तो मां बदामा और पत्नी पुष्पांजलि बेसुध हो गई। गांव के लोग भी अश्रुपूरित नेत्रों से अपने माटी के लाल का गुणगान करते रहे। सीधे-सादे, सरल और मृदुवाणी के सुनील की मौत पर गहरा सदमा लगा है।
वाराणसी के चैबेपुर क्षेत्र के पनिहरी गांव निवासी दशरथ यादव के बेटे सेना के जवान सुनील यादव जोधपुर राजस्थान में तैनात थे। गुरुवार को घर वापसी के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शनिवार की दोपहर सेना के जवानों ने ताबूत में शव लेकर जब घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। घर पर हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने जवान को अंतिम विदाई दी।
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बीते 29 फरवरी को घर से जोधपुर राजस्थान में ड्यूटी पर पहुंचे थे। होली परिजनों संग मनाने के लिए पुनः घर वापस आ रहे थे। तभी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वर्ष 2014 में सेना के ईएमई कोर में भर्ती हुए थे। घटना के बाद से मृतक सैनिक का शव जब पहुंचा तो मां बदामा और पत्नी पुष्पांजलि बेसुध हो गई। गांव के लोग भी अश्रुपूरित नेत्रों से अपने माटी के लाल का गुणगान करते रहे। सीधे-सादे, सरल और मृदुवाणी के सुनील की मौत पर गहरा सदमा लगा है।
युवाओं की टोली पनिहरी गांव से गौराउपरवार घाट तक नारा लगाते रहे, जब तक सूरज चांद रहेगा सुनील तेरा नाम रहेगा...। तिरंगा झंडा लिए 7 किमी तक पदयात्रा करते गौरा घाट पहुंचे, जहां सुनील का अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि जवान के पिता दशरथ यादव ने दी। इस मौके पर कई राजनैतिक दलों के नेता, समाजसेवी शामिल रहे।