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पांच सौ साल बाद बनेगा सूर्यग्रहण, इन आठ राशियों के लिए भी अशुभ, सबसे बड़े दिन के साथ छह वक्री ग्रह होंगे

Wed, 17 Jun 2020 03:32 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

  • देश और दुनिया समेत 12 में से आठ राशियों के लिए रहेगा अशुभ 
  • पांडुपुत्र चूड़ामणि योग बनने से स्नान और दान का मिलेगा पुण्य लाभ 
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सूर्यग्रहण - फोटो : PTI
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विस्तार
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सदी का दूसरा सूर्यग्रहण कई मायनों में बेहद खास होने जा रहा है। भारत के साथ ही पड़ोसी देशों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। दुर्लभ ग्रह स्थिति में सूर्य ग्रहण होगा और 6 ग्रह वक्री रहेंगे। 500 सालों बाद ऐसी स्थिति बन रही है जब छह ग्रह वक्री, ग्रहण और साल का सबसे बड़ा दिन साथ-साथ होंगे। सूर्यग्रहण देश और दुनिया के साथ ही आठ राशियों के लिए अशुभ रहेगा।

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सूर्यपुराण के अनुसार, रविवार (21 जून) को ग्रहण लगने से पांडुपुत्र चूड़ामणि योग बन रहा है। इस योग में स्नान-दान का करोड़ गुना फल प्राप्त होता है। ज्योतिष के नजरिए से सूर्यग्रहण पर ग्रहों की ऐसी स्थिति बन रही है जो 500 सालों में नहीं बनी। ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि आषाढ़ में लग रहे इस सूर्य ग्रहण के समय 6 ग्रह वक्री रहेंगे। यह स्थिति देश और दुनिया के लिए ठीक नहीं है।

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काशी में होगा 10:31 बजे स्पर्श 
ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि काशी में सूर्य ग्रहण का सुबह करीब 10:31 बजे स्पर्श, मध्य 12:18 और मोक्ष 2:04 बजे होगा। सूतक 12 घंटे पहले यानी 20 जून को रात 10:31 पर शुरू हो जाएगा जो ग्रहण के साथ ही खत्म होगा। ग्रहण भारत, नेपाल, पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूएई, इथियोपिया और कांगो में दिखाई देगा। ज्योतिषीय दृष्टि से 20 जुलाई तक का समय अच्छा नहीं है। अर्थव्यवस्था में और गिरावट आने के संकेत हैं। मृत्युदर और रोग बढ़ सकते हैं। प्राकृतिक आपदाओं की आशंका रहेगी।

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ग्रहण होगा खास 
यह ग्रहण राहुग्रस्त है। मिथुन राशि में राहु सूर्य और चंद्रमा को पीड़ित कर रहा है। मंगल मीन राशि में है और मिथुन राशि के ग्रहों पर दृष्टि डाल रहा है। इस दिन बुध, गुरु, शुक्र और शनि वक्री रहेंगे। राहु और केतु हमेशा वक्री ही रहते हैं। वराहमिहिर के ज्योतिष ग्रंथ बृहत्संहिता के अनुसार, इस स्थिति के कारण आगजनी, विवाद और तनाव के हालात बन सकते हैं। मध्य प्रदेश, उतर प्रदेश, बिहार, कश्मीर और दिल्ली पर इसका विशेष असर रहेगा। साथ ही यमुना नदी के किनारे बसे शहरों पर भी इसका अशुभ असर पड़ेगा।

दो खगोलीय घटनाएं होंगी 
21 जून को दो बड़ी खगोलीय घटनाएं होने वाली हैं। पहली घटना सूर्यग्रहण है। इसमें सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा इस तरह आएगा कि सूर्य का आधे से ज्यादा हिस्सा छिप जाएगा और कंगन की तरह दिखाई देगा। इसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है। दूसरी घटना 21 को ही सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर आ जाएगा। लिहाजा, ये साल का सबसे बड़ा दिन भी होगा। ये सदी का दूसरा ऐसा सूर्यग्रहण है जो 21 जून को हो रहा है। इससे पहले 2001 में 21 जून को सूर्य ग्रहण हुआ था।
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राशियों पर प्रभाव 
शुभ : मेष, सिंह, कन्या और मकर। 
मध्यम : वृष, मिथुन, धनु और कुंभ। 
अशुभ : कर्क, वृश्चिक और मीन। वृश्चिक राशि वालों को विशेष सावधानी और सतर्कता बरतनी होगी। 

सावधानी बरतें 
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि ग्रहण के समय घर से बाहर न निकलें। तीर्थों पर न जा सकें तो ग्रहण से पहले घर में ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहाएं। ग्रहण के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। ग्रहण के दौरान सोना, यात्रा करना, तिनका तोड़ना, लकड़ी काटना, फूल तोड़ना, बाल और नाखून काटना, कपड़े धोना और सिलना, दांत साफ करना, भोजन करना, घुड़सवारी, हाथी की सवारी करना और गाय-भैंस का दूध निकालना वर्जित है।
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