स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) को शिक्षकों की उपस्थिति से पढ़ाई तक पर नजर रखने का जिम्मा मिलेगा। इससे पहले विभाग के सामने पुरानी समितियों की सक्रियता का भी आकलन करने की चुनौती है।
परिषदीय विद्यालयों में नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिले के सभी 1143 विद्यालयों में गठित होने वाली एसएमसी के माध्यम से अभिभावकों की सीधी भागीदारी बढ़ेगी। नए शासनादेश के अनुसार एसएमसी का गठन नवंबर में कराया जाना है। इसके बाद दिसंबर से नई समितियां प्रभावी होंगी। इससे पहले विभाग के सामने पुरानी समितियों की सक्रियता का भी आकलन करने की चुनौती है। स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) को शिक्षकों की उपस्थिति से पढ़ाई तक पर नजर रखने की भी जिम्मेदारी दी जाएगी।
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बीएसए भूपेंद्र सिंह ने बताया कि नई व्यवस्था में एसएमसी की भूमिका केवल बैठक आयोजित करने या विद्यालय के छोटे-मोटे कार्यों तक सीमित नहीं रहेगी। समिति विद्यालय में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने, उनकी सीखने की स्थिति पर नजर रखने और विद्यालय की गतिविधियों में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने में भूमिका निभाएगी। शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और विद्यालय के सुचारु संचालन पर भी समिति नजर रख सकेगी। परिषदीय विद्यालयों में निपुण भारत मिशन के तहत बच्चों को कक्षा के अनुरूप दक्ष बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
नवंबर में गठन, दिसंबर से लागू होगी नई व्यवस्था
शासन के निर्देश के अनुसार एसएमसी के पुनर्गठन की प्रक्रिया नवंबर में पूरी कराई जानी है। इसके बाद दिसंबर से नई समितियां काम करेंगी। विभाग को विद्यालयवार समिति के गठन के साथ ही सदस्यों की भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना होगा।