हजारों की भीड़ में कौन सी किताब, कहां रखी हैं, ये अब ढूंढना नहीं होगा। आईआईटी बीएचयू की लाइब्रेरी में किताबें खुद अपना पता बताएंगी। इसके लिए किताबों की कोडिंग की बजाय उनकी टैगिंग की जाएगी। हर किताब में एक चिप लगी होगी और यही चिप उस किताब की पहचान होगी।
उसकी हर डिटेल सीधे कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से जुड़ी होगी। इन किताबों के ट्रांजेक्शन के लिए छात्र-छात्राओं को स्मार्ट कार्ड इश्यू किया जाएगा जिसके जरिये किताबों का ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। यानी लाइब्रेरी जाकर किताबों को वो सेल्फ इशू और सेल्फ रिटर्न कर सकेंगे। कौन सी किताब किस और कब इश्यू हुई है, इसकी पूरी जानकारी लाइब्रेरी को होगी।
आईआईटी बीएचयू के मुख्य ग्रंथालय को पूरी तरह से हाइटेक और स्मार्ट बनाने की कवायद की जा रही है। स्मार्ट और टेक्नोलॉजी फ्रेंडली होने के नाते छात्र-छात्राओं की सहूलियत के लिए आईआईटी बीएचयू अपनी लाइब्रेरी में आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन) और स्मार्ट कार्ड सिस्टम को लागू करने जा रहा है।
‘आरएफआईडी’ में हर किताबों के कवर पेज के अंदर एक माइक्रो-चिप लगी होगी। इस चिप में किताब का पूरा ब्योरा होगा। उस चिप में एक यूनीक एसेस नंबर होगा। इसी एसेस नंबर से किताब की पहचान होगी। चिप एंटीना से जुड़ा होगा।
इस एंटीना की मदद से ही आरएफआईडी स्कैनर से किताबों को ट्रैक किया जा सकेगा। अगर किताबों के इशू में गड़बड़ी होगी तो स्टूडेंट उसे लाइब्रेरी से बाहर भी नहीं ले जा सकेंगे।
आईआईटी बीएचयू
ई-जर्नल - 15000
ई-स्टैंडर्ड - 60,000
ई-बुक - 50,000
किताबें - 88,730
टेक्स्ट बुक - 18,806
थीसिस - 269
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बीएचयू : साइबर लाइब्रेरी
किताबें - 9,76,411
जर्नल - 1,33,792
पांडुलिपि - 7,233
ऑनलाइन जर्नल - 11,272
ई-बुक - 52,560