देश भर में 43 कॉलेज ने लिया हिस्सा, 36 घंटों तक चलेगा ये मैराथन
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‘स्मार्ट सिटी हैकथॉन 2018’ का उद्घाटन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने किया।
नदियों और जल संरक्षण को तकनीकी उड़ान देने के लिए युवाओं की फौज लगा दी गई है। मोबाइल और इंटरनेट के जरिये इस समस्या का हल ये युवा सुझाएंगे। इसके लिए नन स्टॉप 36 घंटे तक चलने वाले ‘स्मार्ट इंडिया हैकथॉन 2018’ की शुरुआत शुक्रवार से हो गई।
मोबाइल एप्लीकेशन, पोर्टल, वेबसाइट बनाने में देश भर के 43 कॉलेज के 258 युवा अपने 86 मेंटर के निर्देशन में अपने तकनीकी ज्ञान के जरिये इनका समाधान ढूंढने में लगे रहे। कोई भूजल में आर्सेनिक की मात्रा ढूंढने वाला एप्लीकेशन तैयार करने में जुटा रहा तो कोई जल की गुणवत्ता का पता लगाने वाले सॉफ्टवेयर को ईजाद करने में।
दो दिवसीय इस ‘स्मार्ट सिटी हैकथॉन 2018’ का उद्घाटन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने किया। वहीं बीएचयू के एंफीथिएटर मैदान के इंडोर ऑडिटोरियम में बतौर मुख्य अतिथि मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने शुभारंभ किया।
उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण आविष्कार आपकी युवा सोच ही करेगी। विशिष्ट अतिथि के तौर पर बीएचयू कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने कहा कि इस प्रयास से ना सिर्फ अनेक समस्याओं को हल मिलेगा, छात्रों के बीच समूह भावना जागृत होगी।
सुबह आठ बजे से शुरू हुई प्रतियोगिता शाम साढ़े सात बजे तक चली। आठ बजे पीएम वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रतिभागियों से रूबरू हुए।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से भावी इंजीनियर्स जुटे समाधान में
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देश के नौ राज्यों में भूजल में आर्सेनिक की मात्रा बताएं वाला एप्लीकेशन तैयार किया जा रहा है। ये एप्लीकेशन जल के प्रदूषण का हाल बताएगा। एक वेबसाइट भी बनाई जा रही है जिसमें हर राज्य के भूजल की गुणवत्ता का पूरा ब्योरा होगा। - यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, तमिलनाडु
मोबाइल एप्लीकेशन के साथ लोकेटर तैयार किया जा रहा है। प्राइवेट कंपनियों की ओर से नदियों व जल की गुणवत्ता के आंकड़े जो सरकार को उपलब्ध कराए जाते हैं, ये एप्लीकेशन से रि-चेक करेगा। - ट्रूबा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड इंफार्मेशन टेक्नालॉजी, भोपाल
ऐसा मॉडल तैयार किया जा रहा है जिससे एक सीमित क्षेत्र में वहां की जनसंख्या व पानी की उपलब्धता के अनुसार एक दिन में उन्हें कितना पानी इस्तेमाल करना है, ये एप्लीकेशन बताएगा। यहीं खेतों के साथ भी होगा। उसकी गुणवत्ता भी इससे जांची जा सकेगी। - गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली