कमेटी में गैर मुस्लिम का होना गलत
यासीन ने कहा कि वक्फ कमेटी में गैर मुस्लिम नहीं होना चाहिए। रामजन्मभूमि और काशी विश्वनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन मंडलायुक्त होते हैं। वहां तो कोई मुसलमान, पिछड़ा और एसटी वर्ग का व्यक्ति भी नहीं रखा गया। फिर हमारे मसायल में किसी और को क्यों ला रहे हैं? ठीक है आप निगरानी रखिए, सब कुछ करिए। हमें बिल्कुल खुला मत छोड़िए। इसका यह मतलब नहीं कि उसमें उनको भी ला दीजिए, जिनको वक्फ के बारे में एबीसीडी भी मालूम नहीं है। क्या ये लोग वक्फ की डिग्री लेंगे?
एसएम यासीन ने कहा कि हाल ही में हुए सर्वे में पूरे प्रदेश में हजारों वक्फ संपत्तियों को सरकारी जमीन पर बताया गया है। वाराणसी में भी 406 प्रॉपर्टी की सूची सामने आई है। यह कैसे तय हो गया कि ये सरकारी जमीन है? कमलगड़हा इलाके में एक कब्रिस्तान है, उसको सरकारी संपत्ति कह रहे हैं।
सैकड़ों साल से वहां लोग दफन होते आ रहे हैं, तब लोग कहां थे। क्या सरकारी संपत्तियां तब चिन्हित नहीं थीं। अचानक सरकार की संपत्तियां हो गईं। यह बात सही है कि इस्लाम में यह जायज नहीं है कि हड़पी हुई जमीन पर मस्जिद या कब्रिस्तान हो।
नियम सबके लिए होने चाहिए बराबर
एसएम यासीन ने कहा कि अन्य धर्मों के पूजास्थल भी सड़कों, पार्कों और सरकारी जमीनों पर बने हैं। हमें इससे कोई ऐतराज नहीं, लेकिन अगर नियम है तो सबके लिए बराबर होना चाहिए। सबके ऊपर लागू होना चाहिए। समानता का सिद्धांत हर हाल में लागू होना चाहिए। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जो फैसला लेगा, हम वही करेंगे।