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Waqf Bill: एसएम यासीन बोले- वक्फ संशोधन से कमजोर हो सकता है प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, बताई वजह

Sat, 05 Apr 2025 05:44 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Waqf News : अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के ज्वाइंट सेक्रेटरी ने वक्फ संशोधन विधेयक काे लेकर अपनी बात रखी है। कहा कि केंद्रीय नेतृत्व विधेयक का अध्ययन कर रहा है। निष्कर्ष निकलने पर बात रखी जाएगी।
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अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के ज्वाइंट सेक्रेटरी एसएम यासीन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन विधेयक का मसौदा अभी सामने नहीं आया है, लेकिन इससे प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट कमजोर होगा। मौलिक अधिकारों का हनन होगा। यह कहना है अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के ज्वाइंट सेक्रेटरी एसएम यासीन का।

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लोकसभा और राज्यसभा से विधेयक के पास होने के बाद यासीन ने शुक्रवार को प्रतिक्रिया दी और कहा कि केंद्रीय नेतृत्व विधेयक का अध्ययन कर रहा है। जो भी निर्देश मिलेगा, उसी हिसाब से आगे के कदम उठाए जाएंगे। मुस्लिम अभी सड़कों पर नहीं आना चाहते हैं। इससे निपटने का जरिया अदालत ही है। 

अदालत सभी के लिए खुली है। अभी तक यही देखा गया है कि इनकी कथनी और करनी में बड़ा फर्क है। आगे क्या होता है, देखते हैं? जो हमारे साथ नहीं हम उसके साथ नहीं हैं। कानूनी लड़ाई अपनी जगह है, जो कानून व संविधान के दायरे में होगी। यह वक्त हमारे लिए खराब है लेकिन यह हमारे इम्तिहान की घड़ी है। इसमें खरा उतरना है।

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कमेटी में गैर मुस्लिम का होना गलत
यासीन ने कहा कि वक्फ कमेटी में गैर मुस्लिम नहीं होना चाहिए। रामजन्मभूमि और काशी विश्वनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन मंडलायुक्त होते हैं। वहां तो कोई मुसलमान, पिछड़ा और एसटी वर्ग का व्यक्ति भी नहीं रखा गया। फिर हमारे मसायल में किसी और को क्यों ला रहे हैं? ठीक है आप निगरानी रखिए, सब कुछ करिए। हमें बिल्कुल खुला मत छोड़िए। इसका यह मतलब नहीं कि उसमें उनको भी ला दीजिए, जिनको वक्फ के बारे में एबीसीडी भी मालूम नहीं है। क्या ये लोग वक्फ की डिग्री लेंगे?

एसएम यासीन ने कहा कि हाल ही में हुए सर्वे में पूरे प्रदेश में हजारों वक्फ संपत्तियों को सरकारी जमीन पर बताया गया है। वाराणसी में भी 406 प्रॉपर्टी की सूची सामने आई है। यह कैसे तय हो गया कि ये सरकारी जमीन है? कमलगड़हा इलाके में एक कब्रिस्तान है, उसको सरकारी संपत्ति कह रहे हैं।

सैकड़ों साल से वहां लोग दफन होते आ रहे हैं, तब लोग कहां थे। क्या सरकारी संपत्तियां तब चिन्हित नहीं थीं। अचानक सरकार की संपत्तियां हो गईं। यह बात सही है कि इस्लाम में यह जायज नहीं है कि हड़पी हुई जमीन पर मस्जिद या कब्रिस्तान हो।
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नियम सबके लिए होने चाहिए बराबर
एसएम यासीन ने कहा कि अन्य धर्मों के पूजास्थल भी सड़कों, पार्कों और सरकारी जमीनों पर बने हैं। हमें इससे कोई ऐतराज नहीं, लेकिन अगर नियम है तो सबके लिए बराबर होना चाहिए। सबके ऊपर लागू होना चाहिए। समानता का सिद्धांत हर हाल में लागू होना चाहिए। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जो फैसला लेगा, हम वही करेंगे।
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