नगर वधुओं ने किए नृत्य।
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राजा मानसिंह ने शुरू कराया था यह उत्सव
महाश्मशान सेवा समिति के अध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद गुप्ता उर्फ चैनु साव ने बताया कि मान्यता है कि अकबर के नवरत्नों में से एक राजा मानसिंह ने काशी में बाबा मसाननाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। उस दौर में राजा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना चाहते थे, लेकिन कोई भी कलाकार श्मशान में प्रदर्शन के लिए तैयार नहीं था।
तब काशी की नगरवधुओं ने यह जिम्मा उठाया और अपनी कला से बाबा के दरबार को सजाया। यहीं से यह परंपरा शुरू हुई, जो आज तक कायम है। हर साल चैत्र नवरात्र की सातवीं रात को यह उत्सव काशी की श्मशान भूमि पर जीवंत हो उठता है।
नगरवधू शीला ने कहा कि हम हर साल बाबा के दरबार में नृत्य करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि अगले जन्म में हमें इस जीवन से मुक्ति मिले। उनके घुंघरुओं की हर झंकार एक दुआ है, हर थाप एक उम्मीद। यह महाश्मशान महोत्सव सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की उस अनोखी संस्कृति का प्रतीक है, जहां मृत्यु के बीच जीवन नृत्य करता है और मुक्ति की चाह कभी सोती नहीं।