वाराणसी में महाशिवरात्रि पर पांडेय हवेली तिभांडेश्वर मंदिर की ओर से निकली शिव बरात।
- फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि पर महादेव की नगरी काशी में भगवान शिव के विवाह उत्सव का उल्लास जन-जन पर नजर आया। भूतभावन जब दूल्हा बनकर निकले तो उनके पीछे भूत-पिशाच की टोलियां भी शामिल हुईं। अबीर, गुलाल और भस्म उड़ाते शिवभक्त झूमते, नाचते और गाते हुए चल रहे थे। शिव बरात में घोड़ा, ऊंट, नंदी बैल, सपेरा और मदारी के प्रतिरूप आकर्षण का केंद्र थे।
डोमरी में चल रहे सीताराम नामजप रुद्रमहायज्ञ के नौवें दिन मंगलवार को महाशिवरात्रि पर शिव बरात निकाली गई। शिव अपने गणों के साथ पूरी टोली में बरात लेकर निकले, रास्ते भर श्रद्धालु बरात के स्वागत में पुष्पवर्षा करते चल रहे थे।
बाबा शिव की बरात निकली
- फोटो : अमर उजाला
पहली बार गंगा द्वार से श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में प्रवेश मिल रहा है। बाबा दरबार में दर्शन-पूजन का यह सिलसिला लगातार दो दिन यानी बुधवार की रात शयन आरती तक जारी रहेगा। आरती के दौरान बाबा और स्वर्णमयी गर्भगृह में माता गौरा के विवाह की रस्म परंपरागत तरीके से संपन्न हुई। विवाहोत्सव की संपूर्ण व्यवस्था मंदिर न्यास करेगा जबकि वैवाहिक कर्मकांड का विधान पूर्व महंत परिवार ने पूर्ण कराया।
वहीं त्रिपोलिया चौक के पास 51 सिल्ली का बना शिवलिंग आकर्षण का केंद्र बना रहा। सभासद राजू सोनकर की ओर से बर्फ का शिव लिंग, गणेश जी एवं नंदी की मूर्ति स्थापित की गई थी। बटाऊबीर से हनुमान मंदिर के पास पुनवासी जायसवाल के नेतृत्व में बरात का स्वागत किया गया।
काशी विश्वनाथ मंदिर में अव्यवस्था भी नजर आई। एक तरफ सड़क मार्ग पर लोग चार घंटे से कतार में खड़े रहे। वहींललिता घाट की तरफ से बने गंगा प्रवेश द्वार पर लगभग सन्नाटे जैसी स्थिति रही। गंगा घाट से प्रवेश करने के बाद लोग मंदिर चौक के द्वार तक पहुंचे मगर वहां से उन्हें वापस लौटा दिया गया, जबकि कॉरिडोर के एक छोटे से गलियारे से प्रवेश मार्ग बनाया गया था। मार्ग पर लगे पोस्टर इतने छोटे थे कि उन पर लिखा प्रवेश द्वार पर लोगों की नजर ही नहीं पड़ रही थी।