हैंडमेड वुडेन की पहली खेप में बाबा विश्वनाथ की 50 प्रतिकृति को अमेरिका भेजा गया।
- फोटो : अमर उजाला
काशी की बेटियों का हुनर अब देश के साथ ही सात समंदर पार अमेरिका में भी सजेगा। शनिवार को हैंडमेड वुडेन की पहली खेप में बाबा विश्वनाथ की 50 प्रतिकृति को अमेरिका भेजा गया। द स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश भाटिया और हुनर-ए-बनारस के प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने हैंडमेड वुडेन को अमेरिका रवाना किया। पांच से छह दिन में यह अमेरिका पहुंच जाएगा।
ओडीओपी प्रोडक्ट को मिलेगा नया बाजार
हुनर-ए-बनारस के प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने बताया कि काशी परियोजना से पूर्वांचल के जिलों के एक जिला एक उत्पाद को भी वैश्विक बाजार उपलब्ध होगा। हस्तकला शिल्पियों द्वारा बनाए गए गुलाबी मीनाकारी, बुनकरी, हैंडमेड बैग, बाल हैंगिंग टेक्सटाइल डिजाइनिंग, ब्लैक पॉटरी, भदोही की कालीन को काशी धरोहर परियोजना के अंतर्गत उत्पादों को एक ही छत के नीचे ई-मार्केटिंग के जरिये पूरी दुनिया में उपलब्ध कराया जाएगा।
काशी की बेटियों का हुनर अब देश के साथ ही सात समंदर पार अमेरिका के घर-घर में सजेगा।
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दुनिया के किसी भी कोने से मिल सकेगा ऑर्डर
बनारसी हुनर का कोई भी कद्रदान दुनिया के किसी भी कोने से काशी धरोहर के हुनर-ए-बनारस पोर्टल पर अपनी पसंद से सीधे बुनकर को ऑर्डर देकर मॉल मंगवा लेगा। बुनकरों को अपने समान का सही दाम मिल सकेगा। काशी धरोहर परियोजना के परियोजना निदेशक विकास गौरव ने बताया कि महिलाओं एवं शिल्पकारों को बाकायदा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सभी शिल्पियों का खाता आधार कार्ड से जोड़ दिया जाएगा ताकि माल बिकने के बाद पैसा सीधे उनके खाते में आए।
काशी धरोहर परियोजना की खासियत
एक विधा में पारंगत कारीगरों का बनाए जाएगा अलग-अलग समूह।
साइबर क्राइम से बचने की दी जाएगी जानकारी।
हुनर-ए-बनारस पोर्टल के माध्यम से बेचे जाएंगे उत्पाद।
हस्तशिल्प उत्पाद पर शोध करने की सुविधा।
हुनर-ए-बनारस की आर्ट एवं क्राफ्ट गैलरी में विदेशी बायर्स को करेंगे आमंत्रित।
परंपरागत के साथ ही तकनीक रूप से कारीगर होंगे दक्ष।
शिल्पकारों को मिलेगी अपने प्रोडक्ट को मांग के अनुरूप न्यू इनोवेशन, डिजाइन, पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग की सुविधा।
शिल्पकारों को अपने डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से अपने प्रोडक्ट की फोटो शूट करने एवं सोशल मीडिया की पूरी जानकारी।
बिचौलियों का खेल होगा खत्म, कारीगर के खाते में जाएगा सीधे पैसा।