संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के फर्जी प्रमाणपत्रों पर नौकरी करने वाले शिक्षकों की संख्या प्रदेश भर छह हजार से अधिक मिली थी। सत्यापन में सर्वाधिक फर्जी अंकपत्र बलिया, देवरिया, कुशीनगर, आगरा, सिद्धार्थ नगर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, प्रयागराज, सोनभद्र, बागपत समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के मिले थे। इसमें पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा, शास्त्री और बीएड के फर्जी अंकपत्र व फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर छह हजार से अधिक शिक्षक परिषदीय विद्यालयों में नौकरी कर रहे थे।
एसआईटी ने प्रदेश के सभी बीएसए को पत्र भेजकर मध्यमा, शास्त्री और शिक्षा शास्त्री की डिग्रियों की जांच को कहा था और सत्यापन की रिपोर्ट मांगी थी। 16 वर्षों का विवरण तलब कर एसआईटी ने वर्ष 1998 से 2014 के बीच संस्कृत विश्वविद्यालय की डिग्री पर शिक्षक बने अभ्यर्थियों का ब्योरा बेसिक शिक्षा विभाग से तलब किया था। कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ला ने बताया कि शासन से अभी तक उन्हें पत्र नहीं प्राप्त हुआ है।
जनपद में 315 शिक्षक
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के अंक पत्रों व प्रमाण पत्रों पर जनपद में 315 अध्यापक परिषदीय विद्यालयों में नौकरी कर रहे थे। बीएसए ने शिक्षकों की सूची एसआईटी को सौंपी थी। इसमें 25 शिक्षकों के अंकपत्र फर्जी होने की आशंका जताई गई थी। शिक्षकों के अंक पत्रों व प्रमाण पत्रों का सत्यापन कर विवि एसआईटी को रिपोर्ट सौंप चुका है।