रक्षाबंधन पर इस बार भाइयों की कलाई पर चांदी और सोना जड़ित राखियां दमकेंगी। इस साल डोरे वाली रंग बिरंगी राखियों की खरीदारी तो हो ही रही है, साथ ही चांदी की राखियां और सोने के ब्रेसलेट, चेन भी ऑर्डर पर तैयार कराए जा रहे हैं। सराफा कारोबारियों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस साल सराफा भाव कम होने के चलते लोगों का रुझान चांदी की राखी पर अधिक है। 600 से 3000 तक चांदी की राखियां और सोने के ब्रेसलेट, चेन भी 15 हजार से लाख रुपये तक बिक रही हैं। कोरोना संक्रमण कम होने के चलते दुकानदारों और ग्राहकों में भी खरीदारी को लेकर उत्साह है।
लगभग एक क्विंटल चांदी की राखी बनारस में तैयार होकर पूर्वांचल के जिलों, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में भेजी गई हैं। लगभग आठ से दस करोड़ का सराफा कारोबार राखी पर होता है। भाईयों की ओर से उपहार स्वरूप भी बहनों को देने के लिए सोने और चांदी के आभूषण तैयार कराए जाते हैं।
वाराणसी सराफा एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संतोष अग्रवाल ने बताया कि इस साल सोना 48 हजार और चांदी 65 हजार तक है। भाव कम होने के चलते लोग आर्डर पर राखी तैयार करा रहे हैं। चांदी की राखियां बनवाकर 600 से 1500 रुपये में ग्राहकों को उपलब्ध करवा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यनारायण सेठ के अनुसार, पिछले साल तो कोरोना के चलते चांदी और सोने की राखियों के ऑर्डर कैंसिल हो गए थे। हालांकि इस बार बाजार में रौनक दिख रही है। बाजार में मांग बढ़ने से सराफा कारोबारियों के चेहरे भी खिले हुए हैं।
राखी कारोबार में बनारस तीसरे नंबर पर
राखी सराफा बाजार के मामले में देश के तीसरे नंबर पर बनारस का नाम आता है। पहले पर राजस्थान, दूसरे पर कोलकाता है। सोने-चांदी की राखियां राजस्थान के नाथद्वारे, गुजरात के राजकोट और कुछ आगरा से भी बनकर आती हैं।
बच्चों को लुभा रही है रंग बिरंगी राखियां
इस बार चीन द्वारा निर्मित राखियां बाजार में नके बराबर दिख रही हैं। नारियल बाजार के राखी कारोबारी नंदलाल अरोड़ा ने बताया कि बाजार में 10 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की राखी की मांग अधिक है। बच्चों के लिए छोटा भीम, डोरेमोन, मोटू पतलू और कोरोना स्टीकर चस्पा वाली राखियां भी बाजार में है।