श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन तीर्थ भेलूपुर में अष्टाहानिका महापर्व पर चल रहे नौ दिवसीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान का समापन बुधवार को विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुआ। समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर से दीक्षित मुनि धर्म सागर और भाव सागर महाराज के सानिध्य में मांगलिक क्रियाएं हुईं। गुरु पूर्णिमा होने की वजह से आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धाुलओं की भीड़ थी।
सुबह से दोपहर तक श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला चला। उन्होंने दोनों जैन मुनियों के दर्शन किए। धर्म सभा में मुनि भाव सागर महाराज ने कहा कि गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, एक सिद्धांत है। वह अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाला सेतु है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में गुरु के विशेष स्थान पर जोर दिया। मुनि भाव सागर महाराज ने कहा कि नौ वर्ष बाद गुरु पूर्णिमा पर यह विशेष संयोग बना है। उन्होंने चातुर्मास के कलश स्थापित करने वालों को सौभाग्यशाली बताया। इस दौरान दो अगस्त को होने वाले कलश स्थापना दिवस को लेकर कलश स्थापित करने वालों का चयन हुआ। इसमें देश-विदेश के श्रद्धालु 1008 कलशों से भगवान पार्श्वनाथ से जुड़ेंगे।