संबंधित आयुर्वेद चिकित्सक जिसके द्वारा दिये गये प्रमाण पत्र को कोई सरकारी या प्राइवेट संस्था नहीं मानती है तो चिकित्सक तत्काल एनसीआईएसएम को इसकी जानकारी दे सकता है। इसके बाद एनसीआईएसएम की ओर से नोटिस जारी कर कारण पूछा जा रहा है।
प्रोफेसर आनन्द चौधरी ने आयुर्वेद औषधियों के भ्रामक विज्ञापनों के रोकथाम के लिये बने नियमों से इंटर्न को अवगत कराया । कहा कि एक बाजार व्यवस्था में भ्रामक विज्ञापनों से जनता का सामाजिक एवं आर्थिक शोषण निरन्तर हो रहा है। इंटर्न को यह संदेश दिया कि वो अपने चिकित्सकीय जीवन में बिना प्रमाण के, सिर्फ विज्ञापन के आधार वाली औषधियों का प्रयोग न करें।
कार्यक्रम में संकाय प्रमुख प्रोफेसर के एन मूर्ति ने इंटर्न को उपदेशित करते हुये कहा कि समाज में आयुर्वेद चिकित्सकों की जिम्मेदारी पुनः प्रतिष्ठित हो चुकी है अतः आयुर्वेद स्नातकों को एनसीआईएसएम द्वारा प्रदत्त सभी कर्तव्यों एवं अधिकारों का पूर्ण पालन करना चाहिये। कार्यक्रम में प्रो.सीएस पांडेय,डॉ. शिखा सिंह, डॉ. शालिनी आदि लोग मौजूद रहे।