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Varanasi News: श्वेता केसरी ने सुनाई ठुमरी, किशन ने दी तबला वादन की प्रस्तुति

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महाप्रभु वल्लभाचार्य प्राकट्य महोत्सव पर श्री शुद्धाद्वैत जपयज्ञ समिति की ओर से बुधवार को चौखंभा स्थित श्रीवल्लभ गीता श्रीकृष्ण भवन में संगीत संध्या का आयोजन हुआ। वैष्णव श्वेता केसरी ने ठुमरी और दादरा सुनाकर श्रोताओं संग ठाकुर जी को मगन कर दिया।
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मदन मोहन प्रभु कामवन (वृंदावन) के आचार्य गोस्वामी कल्याण राय महाराज की अध्यक्षता में वैष्णव श्वेता केसरी ने राग सोहनी की बंदिश सुनाई। बोल थे- काहे करत हो मोसे रार...। उन्होंने राग पुरिया कल्याण में विलंबित रचना के बाद रचना विलास और अलग-अलग रगों में परंपरागत ठुमरी, चैती, दादरा सुनाकर वैष्णवों को रसासिक्त किया। तबले पर पं. किशन रामडोहकर ने संगत की। इसके बाद किशन का स्वतंत्र तबला वादन हुआ। आचार्य गोस्वामी कल्याण राय महाराज ने कहा सनातन धर्म की रक्षा में प्रमुख पांच आचार्य हुए। इसमें जगद्गुरु शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, माधवाचार्य, निंबार्काचार्य और महाप्रभु वल्लभाचार्य प्रमुख हैं। यह सभी भगवान के ही अवतार हैं। महाप्रभु वल्लभाचार्य राधा और कृष्ण के संयुक्त अवतार हैं। काशी ही महाप्रभु वल्लभाचार्य की कर्मस्थली रही है। उनका विद्या अध्ययन, विवाह संस्कार, यगोपवित्र संस्कार काशी के हनुमान घाट और पंचगंगा घाट पर हुआ था। पुष्टिमार्ग की स्थापना महाप्रभु ने की थी। महोत्सव के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को रंगकर्मी अनूप अग्रवाल और विनीता नागपुरी के निर्देशन में विवेक, धैर्य, आश्रय नाटक का मंचन होगा। इस मौके पर आचार्य गोस्वामी सुरेशबाबा, वल्लभ, घनश्याम, अखंड सौभाग्यवती श्रीआभा, अंकित पारिख, बीडी गुजराती, पं. अशोक शर्मा, अशोक बल्लभदास आदि रहे।
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