वाराणसी। देवी उपासिका मां साध्वी गीतांबा तीर्र्थ ने कहा कि दुर्गाकुंड स्थित मां कूष्मांडा राजा सुदर्शन की भक्ति से प्रसन्न होकर प्रगट हुई थीं। माता के आशीर्वाद से ही राजकुमार सुदर्शन राजा बने और राजा सुदर्शन ने माता से प्रार्थना किया कि वह काशी में ही विराजमान हों। इस पर प्रसन्न होकर मां दुर्गाकुंड क्षेत्र में प्रकट हुई और वहीं पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने लगीं। आज यही मंदिर मां कूष्मांडा के रूप में प्रसिद्ध है।
रविवार को डाफी स्थित अशोकपुरम कालोनी में साध्वी गीतांबा तीर्थ ने कथा का वर्णन करते हुए कहा कि देवी भगवती ने काशी नरेश की कन्या शशिकला को स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि तुम राजकुमार सुदर्शन से विवाह कर लो। इसके बाद स्वयंवर आयोजित किया गया और दूसरी रानी लीलावती के पिता ने आक्रमण कर दिया। अपने को घिरा देखकर सुदर्शन ने मां भगवती का ध्यान किया और माता प्रगट हुईं। युधाजीत की सेना को मार गिराया। राजकुमार सुदर्शन की शादी काशी नरेश की कन्या से हो गई।