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शास्त्री और आचार्य की व्यक्तिगत परीक्षा पर नहीं लगेगी रोक

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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शास्त्री और आचार्य में व्यक्तिगत (प्राइवेट) छात्रों की परीक्षा पर रोक नहीं लगेगी। स्नातक, स्नातकोत्तर और पीजी डिप्लोमा के योग के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम शुरू होंगे। वहीं एमलिब, गृहविज्ञान स्नातकोत्तर और ज्योतिष का सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू होगा। सोमवार को कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में विद्यापरिषद की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय पर मुहर लगाई।
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कुलपति की अध्यक्षता में हुई बैठक की शुरुआत में पिछली विद्यापरिषद की कार्यवाही की पुष्टि की गई। इसके साथ ही विद्यापरिषद ने नई शिक्षा नीति के अनुसार, पाठ्यक्रम संशोधन पर सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की। निर्णय लिया गया कि सभी संकायों से प्राप्त पाठ्यक्रम संशोधन एवं नवीन पाठ्यक्रम को नई शिक्षा नीति के अनुसार सरल मानक संस्कृत भाषा में शास्त्रों का अध्ययन-अध्यापन कराने के लिए समीक्षा की जाए। समीक्षा एवं क्रियान्वयन करने के लिए विद्या परिषद ने कुलपति को अधिकृत किया। व्यक्तिगत परीक्षा व्यवस्था पर विचार करते हुए निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय में परंपरागत शास्त्री व आचार्य के अध्ययन व अध्यापन होते हैं तथा इस तरह का पाठ्यक्रम अन्य विश्वविद्यालयों में नहीं है। इसलिये विद्या परिषद ने सर्वसम्मति से व्यक्तिगत परीक्षा व्यवस्था को बंद करना अस्वीकार किया। विश्वविद्यालय की आय को बढ़ाने के लिए सर्टिफि केट, पीजी डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर के चार नए स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम शुरू करने पर मुहर लगा दी। महाविद्यालयों में बैचलर आफ वोकेशन स्टडीज के नवीन पाठ्यक्रम संचालन को भी स्वीकृति नहीं दी गई। वहीं शास्त्री और आचार्य में दाखिले के लिए 45 प्रतिशत अंकों की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई। इस दौरान प्रो. महेंद्र पांडेय, डॉ.ओमप्रकाश, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. प्रेमनारायण सिंह, प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. सुधाकर मिश्र, डॉ.नीलिमा गुप्ता, डॉ . विजय कुमार पांडेय, प्रो. राघवेन्द्र जी दुबे, प्रो. अमित शुक्ल, प्रो. ब्रज भूषण ओझा, डॉ. दिनेश कुमार गर्ग आदि उपस्थित थे ।
शुरू होंगे नए पाठ्यक्रम
- स्नातक योग त्रिवर्षीय/ चतुवर्षीय, आचार्य द्विवर्षीय, एक वर्षीय पाठ्यक्रम
- पीजी डिप्लोमा इन योग पाठ्यक्रम
- एमलिब एवं गृह विज्ञान स्नातकोत्तर तथा ज्योतिष में त्रैमासिक पाठ्यक्रम
कुलपति करेंगे पांच शिक्षाविदों को नामित
विद्यापरिषद ने कुलपति को पांच राष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविदों को विद्यापरिषद में नामित करने के लिए अधिकृत किया। कुलपति अगली विद्यापरिषद की बैठक में विद्वानों को नामित करके विद्या परिषद को सूचना देंगे।
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