26 को सूर्योदय में तिथि मिलने से पूर्णिमा दिनभर मान्य रहेगी। शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को स्वेत पदार्थों से पूजन का विधान है। सफेद फूलों को चढ़ाकर खीर का भोग लगेगा। दूध से अर्घ्य देकर पूजा होगी। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर ययीजय, सवार्थसिद्ध, रवि, हर्षण और प्रवर्धमान योग बन रहा है। इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:42 से 12:27 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त में शाम 05:42 से 06:07 बजे पूजा होगी।
जीआई और एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) जैसे प्रयासों से गुलाबी मीनाकारी को वैश्विक पहचान मिली है। इस कला के प्रति युवाओं की रुचि फिर से बढ़ रही है। इससे काशी की सदियों पुरानी शिल्प परंपरा आगे बढ़ रही है और आजीविका के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। -अभिषेक प्रियदर्शी, उपायुक्त उद्योग