फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा कि कैफी साहब का विजन मुझसे बहुत बड़ा था। उन्होंने वर्ष 2002 में ही गांव में कंप्यूटर शिक्षा की शुरूआत की थी। आज जो मोबाइल है वह भी एक कंप्यूटर है। डिजिटल एजुकेशन की शिक्षा शुरू किए जाने में प्लान इंडिया का बहुत बड़ा योगदान है। उक्त बातें उन्होंने शुक्रवार को आजमगढ़ जिले में स्थित अपने पैतृक गांव मेजवा के कैफी आजमी गर्ल्स इंटर कालेज में डिजिटल क्लास रूम के उद्घाटन समारोह में कही।
शबाना आजमी अपने पिता शायर कैफी आजमी के शेर ‘कोई तो सूद चुकाए कोई तो जिम्मा ले उस इंकलाब का जो आज तक उधार सा है..’ सुनाते हुए कहा कि यह शेर आज के बदलते परिवेश के लिए और भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि हम अपने गांव नहीं बल्कि पूरे जिले और देश के लिए काम करना चाहते हैं। शिक्षा सशक्तिकरण का जरिया है। महिलाओं और पुरुषों का आह्वान किया वे स्कूल के हर कार्यक्रम में भाग जरूर लें।
एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह ने कहा कि शबाना आजमी की वजह से मेजवां गांव काफी ऊंचाइयों पर पहुंचा है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से सभी बच्चों को एक ही क्लिक में सूचनाएं मिल जाती हैं। प्लान इंडिया की कार्यकारी निदेशक भाग्यश्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से छात्राओं को काफी जानकारी मिलती है।