बर्फ से ढंके पहाड़ों से होकर आ रही उत्तर-पूर्वी हवाएं शनिवार को भी आफत बनकर बहती रहीं। तन-मन को कंपाने वाली गलन के चलते लोग दिन में भी जहां बच्चों-बुजुर्गों की फिक्र में जुटे रहे, वहीं बाहर निकलने पर तेज हवाओं की चुभन सहना मुश्किल हो गया था।
तापमान में लगातार गिरावट से जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दोपहर में बादलों की ओट से कुछ समय के लिए सूरज की किरणें धरती पर पड़ी मगर ठंड अपने शबाब पर ही रहा।
बनारस सहित पूरे पूर्वांचल में बर्फीली हवाओं का कहर जारी है। ठंड से सबसे ज्यादा प्रभावित पूर्वांचल की खेती हुई है। अरहर, मटर के अलावा सब्जियों के फूल पाला मारने से मुरझा रहे हैं।
पक्षी भी घोसलों से बाहर कम निकल रहे। मवेशियों का भी इस शीत लहर में बुरा हाल है। शनिवार को कोहरा तो कुछ छंटा लेकिन उत्तर-पूर्व की हवाएं बेहाल किए रहीं। दिन के 10 बजे के बाद सूर्यदेव के दर्शन हुए लेकिन धूप का कोई असर नहीं रहा।
दोपहर बाद लोग राहत पाने के लिए धूप सेंकने घाटों और छतों पर पहुंचे। इससे कुछ राहत महसूस की गई, लेकिन बर्फीली हवा के आगे धूप का बहुत जोर नहीं था। शीत लहर के बावजूद गंगा किनारे घाटों पर युवाओं और सैलानियों की भीड़ रही।
उधर, बाबतपुर मौसम केंद्र ने अधिकतम 16.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9.1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया। बीएचयू की मौसम परीक्षणशाला ने सतह पर हवा की रफ्तार 12 किमी प्रति घंटा से अधिक रिकार्ड की।
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा इकाई के प्रभारी डॉ. एसएन पांडेय ने बताया कि वार्म फ्रंट जम्मू पहुंचने वाला है। जब तक वार्म फ्रंट की ब्रांच यहां नहीं आएगी, तब तक लोगों को शीत लहर का सामना करना पड़ेगा।