फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खिदमत: मदीने में सात हजार मरीजों का किया इलाज, डायबिटीज के केस सबसे ज्यादा; इस डॉक्टर को मिला जियारत का मौका

Thu, 18 Jul 2024 12:16 PM IST
अमन विश्वकर्मा रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: घर लौटने के बाद अकीदतमंदों की सेवा करने वाले डॉ. शेर मोहम्मद ने अमर उजाला से बातचीत की। उन्होंने कहा कि मुझे जो मौका मिला है, उसके लिए मैं खुदा का शुक्रगुजार हूं। बताया कि मक्का में अलग-अलग डिस्पेंसरी बनाई गई थी ताकि मरीजों को सहूलियत मिल सके।
विज्ञापन
बच्चे और महिला की जांच करते डॉ. शेर मोहम्मद। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

करीब ढाई महीने तक दुनिया की सबसे पाक सरजमीं पर लोगों की खिदमत करने का मौका बनारस के चिकित्सक डॉ. शेर मोहम्मद को मिला। बीते ढाई महीनों में उन्होंने सात हजार हाजियों को डॉक्टरी सलाह देकर उनकी खिदमत की। इनमें सबसे ज्यादा केस डायबिटीज के सामने आए। 

विज्ञापन


डॉ. शेर मोहम्मद के मुताबिक दूसरे मुल्क की आबोहवा के चलते कई जायरीन को वायरल फीवर भी हुआ। हृदय रोग की समस्या भी देखने को मिली। कई बच्चे निमोनियाग्रस्त भी मिले।

बड़ागांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. शेर मोहम्मद का कहना है कि हर मुसलमान हज की ख्वाहिश रखता है। लेकिन, मेरा हज ऐसे पूरा होगा, इसका अंदाजा नहीं था। मुझे न सिर्फ काबा का तवाफ करने का मौका मिला, बल्कि हाजियों की खिदमत करने का भी मौका मिला। ये मेरे लिए दोहरा सवाब कमाने का जरिया बना। ये हजयात्रा को मैं कभी नहीं भूल सकता।
विज्ञापन


काबा में मरीजों की सेवा करने के लिए हज कमेटी की मांग पर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ की टीम भी भेजी गई थी। यूपी से भी इसमें 17 डॉक्टर और 10 पैरामेडिकल स्टाफ का चयन किया गया। डॉ. शेर मोहम्मद के अनुसार वह पहले ऐसे डॉक्टर हैं, जिन्हें हाजियों की सेवा का मौका मिला। 

25 अप्रैल से 14 जुलाई तक करीब ढाई महीने से अधिक समय तक मरीजों से जुड़ाव बना रहा। यात्रा से लौटने के बाद अमर उजाला से बातचीत में डॉ. शेर मोहम्मद ने कहा कि हज यात्रा के दौरान भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश, सउदी अरब, ईराक, इरान आदि जगहों से आए हाजियों का इलाज किया गया।

डेढ़ माह मक्का, 15 दिन मदीने में इलाज
प्रतिनियुक्ति पर हजयात्रियों की सेवा के लिए नियुक्त डॉ. शेर मोहम्मद के अनुसार मक्का में 15 अलग-अलग डिस्पेंसरी भी बनाई गई थी। इसके अलावा छोटे-बड़े अस्पताल भी कनेक्ट में रहे। ढाई महीने में डेढ़ माह तक मक्का के अजीजिया में और 15 दिन में मदीना में बने 20-30 बेड वाले अस्पताल की ओपीडी में मरीजों का इलाज किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें