इस घटना से हॉल में मौजूद सभी लोग दंग रह गए। लेकिन प्रोफेसर यहीं नहीं रुके, उन्होंने शोध छात्र शिवम को जोर-जोर से जातिवादी मानसिकता से अपशब्द का प्रयोग करते हुए चिल्लाते हुए कहने लगे कि तुमको इतना भी तमीज नही है कि खाते समय फोटो खींच रहे हो?
इसपर रचना शरीर विभाग की विभागाध्यक्ष और वायवा लेने आईं एक्सटर्नल एक्सपर्ट ने प्रोफेसर को समझा-बुझा कर शांत कराने की कोशिश की तो प्रोफेसर उनपर भी भड़क गए और उन दोनों महिला प्रोफेसर्स (विभागाध्यक्ष और एक्सटर्नल एक्सपर्ट) को भी अपशब्द कहा।
कहा कि शोध छात्र शिवम को भी यह धमकी दी की छह महीने बाद मैं ही इस विभाग का अध्यक्ष बनने वाला हूं, उसके बाद तुमको अच्छे से बताऊंगा। पीड़ित शोध छात्र शिवम अपने साथ हुए इस जातिवादी मानसिकता की घटना का एक शिकायती पत्र विश्वविद्यालय के कुलपति को, उसकी एक प्रतिलिपि डीन ऑफ़ स्टूडेंट को , एक प्रतिलिपि रजिस्ट्रार ऑफिस को एवं एक प्रतिलिपि विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल ऑफिस में दिया, लेकिन अभी तक कोई कारवाई नही हुई है।
कोई कारवाई नही होने से शोध छात्र शिवम कुमार मानसिक रूप से तनाव एवं अवसाद में हैं।
इस मामले में बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर एसपी सिंह का कहना है कि छात्र ने 15 जून को शिकायत दी थी। उसी दिन विभाग की हेड को कार्रवाई के लिखा गया। 21 जून को विभागाध्यक्ष का ई-मेल आया कि चूंकि यह प्रकरण आरडीसी की बैठक में हुआ है जिसकी मैं खुद अध्यक्षता कर रही थी। मेरा जांच करना उचित नहीं है। इसके बाद संकाय के डीन को कार्रवाई के लिए लिखा गया है लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं है।
इस मामले में बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर एसपी सिंह का कहना है कि छात्र ने 15 जून को शिकायत दी थी। उसी दिन विभाग की हेड को कार्रवाई के लिखा गया। 21 जून को विभागाध्यक्ष का ई-मेल आया कि चूंकि यह प्रकरण आरडीसी की बैठक में हुआ है जिसकी मैं खुद अध्यक्षता कर रही थी। मेरा जांच करना उचित नहीं है। इसके बाद संकाय के डीन को कार्रवाई के लिए लिखा गया है लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं है।