संविधान घर से ही प्राप्त होता है, इसमें नियम कानून सब होते हैं। सत्मार्ग परोपकार मोहल्ला और समाज से मिलता है। पुरातन संस्कृति और महापुरुषों से हटकर संविधान की परिकल्पना की गई। संविधान में रामायण व द्वापर काल की बातें समाहित है। यह विचार हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने शुक्रवार को संविधान दिवस पर सिविल कोर्ट परिसर स्थित मनोरंजन कक्ष में आयोजित गोष्ठी में व्यक्त किए।
अधिवक्ता परिषद की ओर से कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि संविधान विशेषज्ञ वीरेंद्र जायसवाल ने कहा कि संविधान अपने लाभ के लिए अंग्रेजों ने बनाया और उसी अनुरूप दंड तय किया। इसके पहले धर्म धारण योग्य था, जिसमें कर्तव्य निहित था। गलत करने वालों के खिलाफ खड़े होने के बजाय सुधरने की नसीहत देनी होगी। संविधान से पूर्व भारत सोने की चिड़िया था और धनधान्य से पूर्ण था।
कार्यक्रम में जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने कहा कि संविधान ग्रंथ है, जिसमें सब कुछ समाहित है। समय समय पर हाईकोर्ट व सुप्रीमकोर्ट द्वारा इसमें संशोधन करने से जनता को लाभ मिला है। इस दौरान बनारस इकाई के अध्यक्ष सत्येन्द्र राय, विवेकानंद उपाध्याय, विजय शंकर रस्तोगी, आरपी पांडेय, राजेश मिश्र, अशोक सिंह प्रिंस, शशिकांत राय चुन्ना, मदनमोहन यादव, रजनीश अग्रवाल, विकास श्रीवास्तव, वीरेंद्र शर्मा, मुरलीधर सिंह आदि शामिल रहे।
पुलिस लाइन से लेकर थानों तक में मना संविधान दिवस
संविधान दिवस पुलिस लाइन में मनाया गया। इस दौरान पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने पुलिसकर्मियों को संविधान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दी। उधर, हरहुआ स्थित पुलिस ग्रामीण कार्यालय और पुलिस लाइन में संविधान दिवस के बारे में पुलिसकर्मियों को एसपी ग्रामीण अमित वर्मा ने जानकारियां दी। वहीं 34वीं वाहिनी पीएसी के परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय एकता और अखंडता की शपथ के साथ संविधान दिवस मनाया गया। सेनानायक राजीव नारायण मिश्र ने जवानों को संविधान दिवस के महत्व के बारे में जानकारी दी।