वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन सहित अन्य स्टेशनों पर फेस रिकाग्निशन टेकभनालाजी का उपयोग बहुत जल्द किया जाएगा। जिससे कि रेल अपराधी आरपीएफ के हत्थे चढ़ सकेंगे। साउथ के बंगलुरू सहित अन्य स्टेशनों पर फेस रिकॉग्निशन टेकभनालाजी का उपयोग किया जा रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक से अपराधों पर लगाम लगाने को लेकर ऐसा साफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। उक्त बातें डीजी आरपीएफ अरूण कुमार ने मंगलवार को पूर्वोत्तर रेलवे के डीआरएम बिल्डिंग लहरतारा में मीडिया से कहीं। उन्होंने बताया कि वाराणसी मंडल के रेलवे स्टेशनों की सिक्योरिटी को लेकर विशेष कार्ययोजना बनाई गई है।
स्टेशन सिक्योरिटी प्लान के तहत कैंट से लगायत अन्य रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा एयरपोर्ट सरीखा बनाने की कवायद चल रही है। कमजोर हो चुके रेलवे एक्ट को मजबूत बनाने पर भी सहमति बनी है। चेनपुलिंग, जहरखुरान, बाल और महिला अपराध के आरोपियों की सजा व जुर्माना बढ़ाया जाएगा।
लावारिस सामान की आटोमैटिक मिलेगी सूचना
डीजी आरपीएफ अरूण कुमार ने बताया कि जिस तरह कुंभ की सुरक्षा तगड़ी बनाई गई थी। उसी तरह स्टेशन की सुरक्षा पुख्ता होगी। ऐसे साफ्टवेयर विकसित किए जा रहे हैं। इस तरह का टाइम साफ्टवेयर में सेट किया जाएगा जिससे रेलवे स्टेशन पर 15 से 30 मिनट तक लावारिस सामान की सूचना अलार्म के जरिए आरपीएफ को मिल सकेगी। आग लगने की स्थिति में धुआं उठते ही अलार्म सूचित करेगा। उन्होंने बताया कि आरपीएफ की कार्य प्रणाली पहले से और बेहतर हुई है। 50 परसेंट वर्क आउट आपीएफ के सहारे जीआरपी कर रही है।
डीरेका व मंडुवाडीह का किया निरीक्षण
वाराणसी। पूर्वोत्तर रेलवे, उत्तर रेलवे एवं डीरेका के रेलवे सुरक्षा बल के जवानों के लिए आयोजित ‘सुरक्षा सम्मेलन’ में डीजी आरपीएफ ने शिरकत किया। डीजी आरपीएफ ने डीरेका का निरीक्षण किया। डीरेका आरपीएफ के तत्वावधान में प्राविधिक प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित सम्मेलन में डीजी आरपीएफ अरूण कुमार ने कहा कि रेलवे सुरक्षा बल के लिए नीति निर्धारण मैन्युअल तैयार किए गये है। जिसे एक जनवरी को जारी किया जाएगा। सम्मेलन में अतुल कुमार श्रीवास्तव, महानिरीक्षक सह प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त, पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर, मंडल सुरक्षा आयुक्त ऋषि पांडेय आदि रहे। उधर, डीजी आरपीएफ ने मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को परखा।