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लखनऊ में दो आतंकियों के पकड़े जाने के बाद वाराणसी में प्रधानमंत्री के आगमन से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

Sun, 11 Jul 2021 10:29 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

दो आतंकियों के लखनऊ में पकड़े जाने के बाद से प्रदेश भर में सुरक्षा एजेंसियों को एलर्ट कर दिया गया। सिलसिलेवार आतंकी हमले झेल चुके बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 जुलाई के आगमन के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क हैं। 
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वाराणसी में प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए संपूर्णानंद विश्विद्यालय का निरीक्षण करते प्रमुख सचिव व डीजीपी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आतंकवादी अलकायदा समर्थित अंसार गजवातुल हिंद संगठन से जुड़े दो आतंकियों के लखनऊ में पकड़े जाने के बाद से प्रदेश भर में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया। सिलसिलेवार आतंकी हमले झेल चुके बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 जुलाई के आगमन के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया गया है। 
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रविवार को काशी पहुंचे डीजीपी मुकुल गोयल ने भी प्रधानमंत्री की अभेद सुरक्षा का खाका खींचते हुए किसी भी तरह की सुरक्षा में चूक नहीं होने को लेकर पुलिस अफसरों को चेताया। सिगरा स्थित रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर, संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी, बीएचयू और काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रधानमंत्री का कार्यक्रम संभावित है।

प्रधानमंत्री आगमन से पूर्व डीजीपी मुकुल गोयल और प्रमुख सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने प्रशासनिक अधिकारियों संग बैठक करते हुए सुरक्षा व्यवस्था का पूरा खाका खींचा। तय हुआ कि जिस भी रूट से प्रधानमंत्री की फ्लीट गुजरेगी और उस रूट पर 50-50 मीटर के दायरे में पुलिसकर्मियों की तैनाती और बैरिकेडिंग की जाए। कार्यक्रम स्थलों के आसपास मकानों की छतों पर सशस्त्र जवानों को तैनात किया जाए। सुरक्षा एजेंसियां को भी एलर्ट करते हुए सभी क्षेत्रों में नजर रखने को कहा। 
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काशी ने झेला है आतंकी हमला, गई हैं 26 जानें 

सांस्कृतिक शहर काशी आतंकियों के निशाने पर रही है। दशक भर पूर्व शहर में छह आतंकी धमाके हुए थे और 26 जानें गई थीं। दशाश्वमेध घाट पर 23 फरवरी 2005 को पहला धमाका हुआ था। इसमें सात लोगों की मौत और नौ लोग घायल हुए थे। सात मार्च 2006 को संकटमोचन मंदिर और कैंट स्टेशन पर धमाका हुआ था।

कैंट स्टेशन धमाके में तीन लोग मारे गए और 22 लोग घायल हुए थे, जबकि संकटमोचन मंदिर धमाके में तीन की मौत और 48 लोग घायल हुए थे। 25 जुलाई 2005 को श्रमजीवी एक्सप्रेस विस्फोट में सात लोग मारे गए और 85 लोग घायल हुए थे। 23 नवंबर 2007 में वाराणसी कचहरी में विस्फोट हुआ था और चार की मौत, 157 लोग जख्मी हुए थे। सात दिसंबर 2010 को शीतला घाट पर हुए ब्लास्ट में दो लोगों की मौत और 48 घायल हुए थे।
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