काशी विश्वनाथ मंदिर का आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिक पांच नवंबर को निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपेंगे। इससे पहले आईआईटी मद्रास की टीम से डॉ. अनुज मेनन की अगुवाई में 27-28 मई को प्रारंभिक सर्वे किया गया था और टीम ने 11 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों की टीम पांच नवंबर को श्री काशी विश्वनाथ धाम का दौरा करेगी और मंदिर की संरचना पर पड़ रहे पर्यावरणीय प्रभाव की जांच करेगी। बड़े स्तर पर परीक्षण के लिए खासतौर से तकनीकी पहलुओं की समीक्षा होगी। स्थलीय निरीक्षण के बाद आईआईटी की टीम जो रिपोर्ट सौंपेगी उसके आधार पर मंदिर प्रशासन कार्रवाई करेगा। ये जानकारी बुधवार को मंदिर सीईओ सत्यम मिश्रा ने दी। इससे पहले आईआईटी मद्रास की टीम से डॉ. अनुज मेनन की अगुवाई में 27-28 मई को प्रारंभिक सर्वे किया गया था और टीम ने 11 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
विज्ञापन
रिपोर्ट में बताया गया था कि मंदिर परिसर के ढांचे अत्यंत प्राचीन हैं, इसलिए पत्थरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए वैज्ञानिक पद्धति से विस्तृत अध्ययन जरूरी है। सर्वे की अनुमानित लागत सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन ने बीते तीन सितंबर को आईआईटी मद्रास को 18 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर हस्तांतरित कर दी है।
मंदिर और ढांचे का दोबारा होगा सर्वे
स्थापत्य कला और शिलाओं को समय की मार से बचाने के लिए मंदिर और ढांचे का नए सिरे से सर्वे शुरू किया जा रहा है। मंदिर के सदियों पुराने पत्थर के खंभों, गर्भगृह की दीवारों और शिखरों पर जड़े स्वर्ण आवरण के क्षरण को रोकने के उद्देश्य से आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञ आधुनिक उपकरणों से इसका वैज्ञानिक सर्वे करेंगे। इस सर्वे का मुख्य लक्ष्य मूल वास्तुकला से कोई छेड़छाड़ किए बिना पत्थरों और स्वर्ण कलशों की मजबूती को सुरक्षित रखना है।