सावन भर बारिश न होने से धान की फसल काफी प्रभावित हुई। किसान धान की फसल का रकबा घटा कर फूल और सब्जी की खेती की तैयारी कर रहे हैं। जिन किसानों ने धान की खेती की है, उन्हें भी फायदे के आसार नहीं है। इधर कृषि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बारिश न होने से 30 से 35 प्रतिशत तक धान के उत्पादन पर असर पडे़गा।
किसान रविंद्र पटेल के अनुसार नलकूप और निजी साधनों के सहयोग से किसानों ने धान की रोपाई तो कर ली लेकिन अब बारिश के पानी के बगैर फसलों का विकास रुक गया है। दुर्गानारायण का कहना है कि शुरुआती बारिश में धान की रोपाई तो कर ली लेकिन अब सिंचाई के लिए किसी भी माध्यम से पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा।
बारिश न होने धान की फसल पर 30 प्रतिशत तक असर पडे़गा। अगस्त में बारिश के पानी से धान के कल्लों का विकास होता है जिसमें बालियां अधिक लगती हैं, लेकिन बारिश न होने कल्लों की संख्या कम होने से उत्पादन भी कम होगा। - डॉ. नरेंद्र रघुवंशी, कृषि वैज्ञानिक, केविके
वाराणसी जिले में पिछले साल 47967 हेक्टेयर क्षेत्रफल के मुकाबले इस बार 47405 हेक्टेयर में धान का उत्पादन का लक्ष्य है जो पिछले साल के मुकाबले 562 हेक्टेयर कम है। बारिश न होने से उत्पादन पर असर पड़ेगा। - संगम सिंह मौर्य, जिला कृषि अधिकारी