सावन के पांचवें और अंतिम सोमवार को काशीपुराधिपति सपरिवार झूले पर विराजमान होंगे। श्रावण पूर्णिमा पर बाबा का झूलनोत्सव श्रंगार किया जाएगा। मंदिर परिसर को कामिनी की पत्तियों और फूलों से सजाया गया है। इसके लिए मंदिर में रविवार देर रात तक तैयारियां चलती रहीं।
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बाबा विश्वनाथ का दरबार भक्तों के लिए सजधज कर तैयार हो गया है। श्रद्धालुओं के लिए कराई गई बैरिकेडिंग में रेड कार्पेट बिछा दी गई है। मंगला आरती के बाद मंदिर में दर्शन पूजन आरंभ हो जाएगा।
मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए तीन अलग-अलग मार्ग तैयार किए गए हैं। तीनों मार्ग पर सैनिटाइजर और थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है। कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए सभी श्रद्धालुओं को मास्क पहनना अनिवार्य होगा और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल, पेन, घड़ी, पेनड्राइव आदि लेकर मंदिर में न आएं। इससे दर्शन में परेशानी होगी। दूसरा मंदिर परिसर में विग्रह, दीवार या रेलिंग को स्पर्श करने से बचें।