रुद्राभिषेक में महादेव को 22 तीर्थों का जल भी अर्पित किया गया। उसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, हरिद्वार, रामेश्वरम्, गंगोत्री, नर्मदा, गोमती, पुष्कर, मंदाकिनी, प्रयागराज संगम, गंगासागर, लोहा बिरजी, अलकनंदा, नर्मदा, काशी के गंगाजल और महामृत्युंजय महादेव के धन्वंतरि कूप के जल के साथ समस्त नदियों के जल के मिश्रण से बाबा का अभिषेक किया गया।
बालव्यास श्रीकांत शर्मा ने कहा कि काशी में सावन में रुद्राभिषेक करने का सहस्त्र कोटि यज्ञ करने का समान फल प्राप्त होता है। इस सांसारिक दुनिया में सबकुछ नश्वर है, जो कुछ है वह भस्म है, इसलिए बाबा विश्वनाथ सदैव भस्मी ही रमाए रहते हैं। रुद्राभिषेक के दौरान बालव्यास ने भजनों की गंगा भी बहाई। उन्होंने भजन सारे जग का है वह रखवाला, मेरा भोला बाबा बड़ा भोला भाला... भी श्रद्धालुओं को सुनाया। इस अवसर पर अवधेश खेमका, राजेश तुलस्यान, महेश चौधरी, सुरेश तुलस्यान, दीपक बजाज, जयकिशन केडिया, कृष्ण कुमार काबरा शामिल रहे।