बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए यादव बंधु
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किसी के हाथ में जल तो किसी के हाथ में माला, मंदिर के कपाट खुलते ही आस्था व भक्ति की गंगा शिव के धाम में अनवरत बह चली। लोटा, कलश और पात्रों में गंगाजल अर्पित करने के साथ ही संतोष के भाव से भरे हुए भक्त भी अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे थे। श्री काशी विश्वनाथ धाम के चारों द्वार पर मध्य रात्रि से ही कतारबद्ध थे। ललिता घाट से स्नान करके भक्त सीधे गंगा द्वार पर कतारबद्ध हो रहे थे। सुबह आठ बजे तक दो लाख 10 हजार भक्तों ने जलाभिषेक किया था। शाम चार बजे तक चार लाख से अधिक शिवभक्त बाबा दरबार में दर्शन कर चुके थे। दोपहर में 12 बजे धाम में हेलीकॉप्टर से कांवरियों पर पुष्प वर्षा की गई।
यादव बंधुओं ने निभाई अपनी परंपरा
सावन के पहले सोमवार को यादव बंधुओं ने अपनी परंपरा के अनुसार बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया। गौरीकेदारेश्वर से जलाभिषेक यात्रा शुरू हुई है। श्री काशी विश्वनाथ धाम में गंगा द्वार से प्रवेश करके पश्चिमी द्वार से गर्भगृह में जलाभिषेक किया।
सावन के पहले सोमवार पर बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर संपूर्ण क्षेत्र को चार जोन और 13 सेक्टर में बांटा गया है। गंगा से लेकर गलियों तक सुरक्षा और निगरानी की पुख्ता व्यवस्था की गई है। विश्वनाथ धाम के इर्द-गिर्द पुलिस के छह उद्घोषणा केंद्र बनाए गए हैं, जो कंट्रोल रूम से जुड़े हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए लखनऊ से आए आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के 25 कमांडो तैनात किए गए हैं।
कमिश्नरेट की पुलिस के अलावा चार एडिशनल एसपी के नेतृत्व में बाहर से आए 85 दरोगा, 600 कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल और छह डिप्टी एसपी के साथ ही पीएसी के दो उप सेनानायक तैनात किए गए हैं। पुलिस कर्मियों के अलावा तीन कंपनी पीएसी और एक कंपनी आरएएफ के जवान भी तैनात किए गए हैं। मेला क्षेत्र में निगरानी के लिए सीसी कैमरों की मदद ली जा रही है। इसके अलावा बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और दमकल कर्मियों के साथ ही माहौल पर नजर रखने के लिए स्थानीय अभिसूचना इकाई के कर्मचारी मेला क्षेत्र में तैनात किए गए हैं।
पुलिस आयुक्त मुथा अशोक जोन ने रविवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम और मेला क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सोमवार को अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए। भीड़ प्रबंधन सही तरीके से हो और यातायात पुलिस के कर्मी अपनी ड्यूटी में लापरवाही न बरतें। सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर श्रद्धालुओं से दुर्व्यवहार की शिकायत नहीं आनी चाहिए।