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Sawan 2022: काशी की भव्यता पर चार चांद लगा मार्कंडेय महादेव मंदिर, महापुरुषों के नाम से बनाए गए द्वार

Thu, 14 Jul 2022 11:57 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर गंगा-गोमती के संगम पर कैथी गांव में विराजते हैं मार्कंडेय महादेव। पुराणों में वर्णित है कि यमराज को भी यहां से पराजित होकर लौटना पड़ा था। सावन में जलाभिषेक के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। 
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राजस्थान के गुलाबी पत्थरों से सजाया गया संगम व गंगा घाट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर गंगा-गोमती संगम के किनारे वाराणसी-गाजीपुर हाईवे किनारे स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर का प्रसिद्ध मंदिर अब बदला-बदला सा नजर आ रहा है। केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार के सहयोग से इसे पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

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विगत तीन वर्षों में यह बदलाव अलौकिक भव्य काशी की भव्यता पर चार चांद लगा रहा है। मार्कंडेय महादेव मंदिर की मान्यता है कि सावन मास में एक लोटा जल रामनाम लिखा बेलपत्र चढ़ाने मात्र से ही लोगों की कामनाएं पूर्ण होती हैं। सांसद व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के प्रयास से करोड़ों रुपये की लागत से मंदिर का जीर्णोद्धार व संगम व गंगा घाट जो राजस्थान के गुलाबी पत्थरों से सजाया गया है।
पढ़ेंः एक लोटा जल चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं होती हैं पूरी, जानिए मार्कंडेय महादेव धाम की कहानी
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यहां गंगा गोमती संगम घाट व गंगा घाट पर लगाई गई जेटी लोगों को आकर्षित कर रही है। सैलानियों की आमद बढ़ने से रोजगार भी बढ़ रहा है। यहां सैलानियों के लिए मोटर बोट चलाने जाने की पहल जारी हो गई है। लाइटिंग, शौचालय, रैन बसेरा, पर्यटन गेस्ट हाउस, धर्मशालाओं का निर्माण किया गया है। 

पाथवे निर्माण भी शुरू

मंदिर के चारों तरफ साढ़े अठारह लाख रुपये से द्वार बनाया गया है। यह द्वार गोस्वामी तुलसीदास, पं मदन मोहन मालवीय, पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नाम पर बनाए गए हैं। वहीं मार्कंडेय महादेव मंदिर की भव्यता के लिए स्वयं सेवी संस्था की मदद से तांबे पर स्वर्ण जड़ित पत्र से मंदिर को सजाया संवारा जा रहा है। गंगा से संगम घाट पर पाथवे निर्माण भी शुरू हो गया है। 
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राजा दशरथ ने यहीं किया था पुत्रेष्टि यज्ञ

मार्कंडेय महादेव धाम - फोटो : अमर उजाला

गंगा-गोमती के तट पर बसा कैथी गांव मारकंडेय जी के नाम से विख्यात है। यह गर्ग, पराशर, शृंगी, उद्याल आदि  ऋषियों की तपोस्थली है। मान्यता है कि इसी स्थान पर राजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति के लिए शृंगी ऋषि ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था। इसके परिणाम स्वरूप राजा दशरथ को चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघभन प्राप्त हुए थे। यही वह तपोस्थली है, जहां राजा रघु द्वारा ग्यारह बार हरिवंशपुराण का परायण करने पर उन्हें उत्तराधिकारी प्राप्त हुआ था। पुत्र कामना के लिए यह स्थल काफी दुर्लभ है।

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