मंदिर के चारों तरफ साढ़े अठारह लाख रुपये से द्वार बनाया गया है। यह द्वार गोस्वामी तुलसीदास, पं मदन मोहन मालवीय, पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नाम पर बनाए गए हैं। वहीं मार्कंडेय महादेव मंदिर की भव्यता के लिए स्वयं सेवी संस्था की मदद से तांबे पर स्वर्ण जड़ित पत्र से मंदिर को सजाया संवारा जा रहा है। गंगा से संगम घाट पर पाथवे निर्माण भी शुरू हो गया है।
गंगा-गोमती के तट पर बसा कैथी गांव मारकंडेय जी के नाम से विख्यात है। यह गर्ग, पराशर, शृंगी, उद्याल आदि ऋषियों की तपोस्थली है। मान्यता है कि इसी स्थान पर राजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति के लिए शृंगी ऋषि ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था। इसके परिणाम स्वरूप राजा दशरथ को चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघभन प्राप्त हुए थे। यही वह तपोस्थली है, जहां राजा रघु द्वारा ग्यारह बार हरिवंशपुराण का परायण करने पर उन्हें उत्तराधिकारी प्राप्त हुआ था। पुत्र कामना के लिए यह स्थल काफी दुर्लभ है।