सावन के सोमवार को संन्यासी भोग के लिए 7500, अखंड दीप के लिए 700, रुद्राभिषेक 20 वर्ष के लिए 25,000, महामृत्युंजय जप (32 शास्त्री एक दिन) के लिए एक लाख व सात शास्त्री से पांच दिन में कराने के लिए 51 हजार रुपये मंदिर कोष में जमा करने होंगे। सावन सोमवार शृंगार के लिए 15,000 रुपये व पूर्णिमा शृंगार को 3700 रुपये शुल्क देना होगा।
सोमवार को बाबा का होगा अलग-अलग शृंगार
सावन 25 जुलाई से शुरू हो रहा है। हर सोमवार बाबा का अलग-अलग स्वरूप में शृंगार किया जाएगा। पहले सोमवार (26 जुलाई) को शिव शृंगार, द्वितीय सोमवार (दो अगस्त) को शिव-पार्वती शृंगार, तृतीय सोमवार (नौ अगस्त) को अर्द्धनारीश्वर शृंगार, चौथे सोमवार (16 अगस्त) को रुद्राक्ष शृंगार और पांचवें सोमवार को शिव-पार्वती-गणेश की चल प्रतिमाओं का झूला शृंगार होगा।
जलाभिषेक की परंपरा निभाएंगे 11 यादव बंधु
सावन के पहले सोमवार पर श्री काशी विश्वनाथ के जलाभिषेक का पेंच सुलझ गया है। यादव बंधु अपने पारंपरिक रूट से 11 यादवबंधु हर साल की तरह बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करेंगे। शुक्रवार को जलाभिषेक को लेकर चन्द्रवंशी गोप सेवा समिति ओर प्रशासन के बीच बातचीत के बाद सहमति बन गई। एसपी सिटी कार्यालय में चन्द्रवंशी गोप सेवा समिति और प्रशासन के अधिकारियों ने पहले सोमवार को होने वाले पारंपरिक जलाभिषेक को लेकर बैठक की।
पहले सोमवार को बाबा विश्वनाथ सहित नौ शिवालयों पर यादवबंधुओं द्वारा होने वाले जलाभिषेक को लेकर चर्चा हुई। समिति के अध्यक्ष लालजी यादव के अनुसार सहमति बनी कि प्रतीक चिन्ह पीतल के ध्वज और डमरू सहित 11 लोग परंपरा का निर्वहन करेंगे। लालजी यादव ने बताया कि जलाभिषेक की परंपरा 1932 में अकाल के बाद शुरू हुई थी। वर्तमान में जलाभिषेक का नेतृत्व भोला सरदार के बेटे लालजी यादव कर रहे हैं।
मंडलायुक्त ने की तैयारियों की समीक्षा
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने शुक्रवार को काशी विश्वनाथ मंदिर और धाम का निरीक्षण कर सावन की तैयारियों की समीक्षा की। निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं के साथ ही व्यवस्था पर ध्यान दिया जाए। परिसर में भीड़ एकत्र नहीं होने दें और श्रद्धालुओें को दर्शन के साथ आगे बढ़ाते रहें। सुगम दर्शन और आरती में शामिल होने वालों की समयसीमा तय करें ताकि ज्यादा भीड़ की समस्या नहीं रहे।