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सतुआ संक्रांति: गंगा स्नान कर सतुआ दान, गुरुद्वारे में वैसाखी की धूम; पर्व पर गुरुद्वारे में टेकेंगे मत्था

Sun, 12 Apr 2026 05:07 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वैशाखी के अवसर पर लोग नए कपड़े पहनकर एक-दूसरे को बधाई देंगे और सामूहिक रूप से इस पर्व को मनाएंगे। धार्मिक आस्था, परंपरा और उत्साह के संगम के रूप में यह दिन शहर में विशेष रौनक लेकर आएगा।
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संक्रांति पर दान करेंगे सतुआ। - फोटो : अमर उजाला
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Satua Sankranti: वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर 14 अप्रैल को मेष संक्रांति, सतुआ संक्रांति और वैसाखी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धालु गंगा स्नान कर देवताओं का पूजन करेंगे और भगवान विष्णु को सतुआ दान कर प्रसाद रूप में उसका सेवन करेंगे।

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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन सुबह 09:38 बजे सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस संक्रमण को ही मेष संक्रांति कहा जाता है। वर्ष में दो प्रमुख संक्रांतियां विशेष महत्व रखती हैं—एक जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे मकर संक्रांति कहा जाता है, और दूसरी जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे मेष संक्रांति के रूप में मनाया जाता है।

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सतुआ संक्रांति के अवसर पर लोग दान-पुण्य का विशेष महत्व मानते हैं। इस दिन सतुआ, गुड़ और अन्य खाद्य पदार्थों का दान किया जाता है, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु गंगा तटों पर स्नान कर पूजा-अर्चना करेंगे और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

वहीं, सिख समाज के लिए वैशाखी का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह फसल कटाई के बाद खुशियों का प्रतीक पर्व है, जिसे विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन गुरुद्वारों में श्रद्धालु मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। शहर के गुरुबाग और नीचीबाग स्थित गुरुद्वारों में गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ और रागी जत्थों द्वारा शबद कीर्तन का आयोजन किया जाएगा, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठेगा।

इसके अलावा मुगलसराय स्थित गुरुद्वारे में भव्य नगर कीर्तन भी निकाला जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। पारंपरिक वेशभूषा में लोग भांगड़ा और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए अपनी खुशी का इजहार करेंगे। 
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