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अक्षय तृतीया पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि व मानस योग, जानें इसका महत्व

Tue, 11 May 2021 10:03 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

चार ग्रहों के गोचर से अक्षय तृतीया पर बन रहा शुभ संयोग।
14 मई को मनाई जाएगी अक्षय तृतीय व परशुराम जयंती।
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अक्षय तृतीया
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विस्तार
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अक्षय तृतीया पर चार ग्रहों के गोचर से शुभ संयोग निर्मित हो रहे हैं। स्वयं सिद्ध मुहूर्त होने के कारण इस दिन किया गया पुण्य व शुभ कार्य का फल अक्षय होता है। वैशाख शुक्ल की तृतीय 14 मई के दिन अक्षय तृतीया मनाई जाएगी।

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काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि इस वर्ष अक्षय तृतीया 14 मई को है। यह सुबह 5:38 बजे से आरंभ होकर अगले दिन प्रात: 8 बजे तक रहेगी और रोहिणी नक्षत्र भी उदयातिथि में है। इसलिए इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग एवं मानस योग बन रहा है।

रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र भी इस तिथि में विचरण करेंगे जो बहुत शुभ हैं। प्रात:काल वृषभ लग्न में चार ग्रहों का गोचर हो रहा है। बुध, शुक्र,राहु और चंद्रमा के विशेष योग से और केतु की लग्न पर दृष्टि होने से इस तिथि का महत्व और बढ़ गया है। इस दिन  स्वयं सिद्धि मुहूर्त होने से कोई भी विशेष कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन और नया व्यापार आरंभ करना बिना किसी विद्वान से पूछे भी संपन्न कर सकते हैं। यह अनबूझ विवाह मुहूर्त होता है।

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पुराणों में वर्णित है कि इस तिथि पर विष्णु और लक्ष्मी माता का प्रभुत्व होता है जिस कारण इस दिन नवीन वस्त्र, आभूषण एवं गृह उपयोग की सामग्री खरीदने से दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति होती है। 14 मई को स्थायी कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, गृह निर्माण एवं वास्तु पूजा आदि कार्य के लिए स्थिर लग्न सिंह लग्न बहुत उपयोगी है। सिंह लग्न दोपहर 12:05 से 14:22 तक रहेगा। इसमें भूमि, भवन एवं विवाह संबंधी कार्य कर सकते हैं। चलायमान कार्य जैसे व्यापार, दुकान, वाहन खरीदना, नया व्यापार आरंभ करना यह सब चर लग्न में शुभ होते हैं। चर लग्न शाम 16:39 बजे से 18:58 तक रहेगा।

जन्म लेने वाली संतान होगी गुणवान
पं. मालवीय ने बताया कि अक्षय तृतीया पर सौरमंडल में ग्रहों की स्थिति अत्यंत उत्तम है। इस दिन सूर्य, चंद्रमा, राहु, केतु उच्च के हैं और शुक्रव शनि स्वराशिस्थ हैं। इस दिन जो भी शिशु जन्म लेंगे वह निश्चित ही विद्यावान, गुणवान, यश कीर्तिवान, लक्ष्मीवान और आयुष्मान होंगे।
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जन्मे थे भगवन परशुराम
अक्षय तृतीया से बहुत सी पौराणिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं। त्रेता युग का आरंभ वैशाख शुक्ल तृतीया को ही हुआ था। भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम जी का जन्म भी इसी तिथि को हुआ था। भगवान परशुराम चिरंजीवी महापुरुष हैं इसलिए यह तिथि चिरंजीवी अथवा अक्षय तृतीया कहलाती है। महाभारत काल में युधिष्ठिर को वनवास काल में भगवान ने इसी दिन अक्षय पात्र दिया था। इस दिन भगवान विष्णु के नरनारायण रूप का भी अनुष्ठान किया जाता है। नर या मनुष्यों में नारायण की कामना को ध्यान में रखते हुए गरीबों एवं दीन.दुखियों की सहायता करनी चाहिए। उन्हें इस दिन भोजन खिलाकर प्रसन्न करना चाहिए।

इस तरह करें पूजा विधि
अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय से पहले पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। अगर आपके आसपास नदी नहीं है तो पानी की बाल्टी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद धूप दीप जलाकर व्रत करने का संकल्प लें। भगवान विष्णु को चंदन लगाकर विधि. विधान से पूजा. अर्चना करेंए फिर भगवान को भोग लगाएं। आप चाहे तो परशुराम जी के मंदिर जाकर दर्शन कर सकते हैं। इस दिन व्रत करने वाले लोगों को किसी तरह का कोई अनाज नहीं खाना चाहिए।

शुभ मुहूर्त
-वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि आरंभ 14 मई को शुक्रवार सुबह 05 बजकर 40 मिनट पर
-वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि समाप्त 15 मई 2021 को शनिवार सुबह 08 बजे
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