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वाराणसी: अमृतवाणी के पाठ से गूंज उठी संत रविदास की कर्मस्थली, 15 दिवसीय पाठ की हुई शुरुआत

Wed, 02 Feb 2022 11:26 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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सीरगोवर्धनपुर में रोटी बनाती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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संत रविदास की कर्मस्थली और मंदिर क्षेत्र अमृतवाणी के पाठ से गुंजायमान हो उठा। 15 दिनों तक अनवरत चलने वाले पाठ की शुरुआत के साथ ही पूरा माहौल भक्तिमय हो चुका है। गुरुवार को पंजाब और हरियाणा से सेवादारों का जत्था पहुंचने के बाद मेला क्षेत्र में तैयारियां भी तेज हो जाएंगी। संत के सपनों का गांव अब आकार ले रहा है।

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सीर गोवर्धन का गांव अब धीरे-धीरे तंबुओं के शहर में तब्दील हो रहा है। श्रद्धालुओं के ठहरने और स्वागत के लिए तैयारियों की रफ्तार सेवादारों के पहुंचने के बाद तेज हो जाएंगे। कोविड प्रोटोकॉल को देखते हुए इस बार मेला क्षेत्र में तंबुओं की संख्या हर साल के मुकाबले ज्यादा बढ़ाई गई है। छह जनवरी के बाद से सीर मिनी पंजाब के रूप में बदल जाएगा।

मंदिर के ट्रस्टी के एल सरोआ ने बताया कि बुधवार को सुबह 9 से 12 बजे तक अमृतवाणी का पाठ हुआ। गुरुवार को पंजाब से संगत आने के बाद सुबह और शाम अमृतवाणी का पाठ जयंती तक किया जाएगा। जयंती समारोह की तैयारियों को अब अंतिम रूप दिया जा रहा है। टेंट सिटी बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। पंजाब से राशन भी पहुंच चुका है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार रैदासियों के रहने के लिए टेंट की संख्या बढ़ाई गई है।

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विदेशों तक नहीं पहुंचेगी अमृतवाणी की गूंज
संत रविदास मंदिर में जयंती के अवसर पर पर होने वाली अमृतवाणी की गूंज कोरोना के कारण इस बार भी विदेशों में नहीं सुनाई देगी। पिछली जयंती पर भी लाइव प्रसारण नहीं हो पाया था। इस बार भी संक्रमण के कारण इंग्लैंड से टीवी और रेडियो की टीम जन्मस्थली नहीं आ पाएंगी। इसके कारण लाइव प्रसारण नहीं होगा। ट्रस्टी ने बताया कि 2015 से टीवी और रेडियो की तरफ से लाइव प्रसारण किया जाता है जो इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा, इटली, फ्रांस, दुबई सहित करीब 100 देशों में होता है।

रविदासिया धर्म बनने के बाद बढ़ा अमृतवाणी का महत्व
संत रविदास के प्रचार प्रसार और जन्मस्थान मंदिर को स्वर्ण मंदिर बनाने के लिए संत निरंजन दास और संत रामानंद ऑस्ट्रिया के वियना में सत्संग कर रहे थे। इसी दौरान 24 मई 2009 में हमला हुआ, इसमें संत रामानंद की मौत हो गई जबकि संत निरंजन दास घायल हो गए। घटना के बाद 2010 में होने वाली जयंती पर रविदासिया धर्म की घोषणा कर दी गई और मंदिर में संत रविदास के अमृतवाणी की शुरुआत की गई। ट्रस्ट के लोगों का दावा है पिछले 12 वर्षों में लगभग 11 करोड़ लोग रविदासिया धर्म से जुड़ चुके हैं।
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मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु कराते हैं अमृतवाणी का पाठ
रैदासिया धर्म के लोग मन्नत पूरी होने पर मंदिर में अमृतवाणी का पाठ कराते हैं। संत मनदीप दास और जिंदर बाबा ने बताया कि भक्त यहां अपनों की सलामती और खुशहाली की दुआ मांगते हैं। जब उनकी मन्नत पूरी हो जाती है तो वह अमृतवाणी का पाठ कराते हैं। मान्यता है कि संत रविदास मंदिर में 365 दिन तक लगातार अखंड स्वर्णदीप जलता रहता है जिसके कारण यहां मन्नत मांगने वाले की मुरादें पूरी होती हैं तो भक्त अमृतवाणी का पाठ कराने के साथ ही खुलकर दान भी करते हैं।

पाठ कराने में लगते हैं तीन घंटे
अमृतवाणी पुस्तक 177 पन्ने में पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। एक पाठ करने में कम से कम तीन घंटे लगते हैं। 15 दिन चलने वाले पाठ का समापन जयंती के दिन भोग लगाकर किया जाएगा।
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