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संत कबीर टेक्सटाइल पार्क: 90 दिनों में तैयार होगी DPR, बोले के. विजेंद्र- एक वर्ष में शुरू हो जाएगा पार्क

Sun, 11 Jan 2026 06:10 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: संत कबीर टेक्सटाइल पार्क के बार में विस्तृत चर्चा हुई। हथकरघा आयुक्त एवं निदेशक के. विजेंद्र पांडियन के साथ बैठक के दाैरान शहर के उद्यमियों ने विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बातचीत की।
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सर्किट हाउस सभागार में उद्यमियों के साथ बैठक करते अधिकारी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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Sant Kabir Textile Park: रमना में प्रस्तावित संत कबीर टेक्सटाइल पार्क के संबंध में शनिवार को सर्किट हाउस सभागार में हथकरघा एवं वस्त्र विभाग, उद्योग विभाग, जिला प्रशासन और उद्यमियों के साथ बैठक हुई। हथकरघा आयुक्त एवं निदेशक के. विजेंद्र पांडियन की अध्यक्षता में हुई बैठक में उद्यमियों ने पार्क को लेकर अपने सुझाव रखे। आयुक्त ने बताया कि टेक्सटाइल पार्क एक वर्ष में शुरू हो जाएगा और 90 दिनों में डीपीआर तैयार कर ली जाएगी।

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आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके चौधरी ने कहा कि प्रदेश में लगभग 97 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग हैं, जिनमें से 87 प्रतिशत सूक्ष्म इकाइयां हैं। उन्होंने पार्क में अधिक से अधिक सूक्ष्म इकाइयों को शामिल करने की आवश्यकता बताई। एसएनडी के प्रतिनिधि भरत शाह ने जल्द से जल्द जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। 

पूर्वांचल उद्योग निर्यात संघ के प्रतिनिधि अमिताभ ने सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को प्राथमिकता देने और हथकरघा एवं वस्त्र दोनों को समान रूप से शामिल करने की मांग की। मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने कहा कि बनारसी ब्रांड को प्रमोट किया जाए और टीएफसी में बनारसी साड़ी के उत्पादन का डेमो किया जाए। आयुक्त के. विजेन्द्र पांडियन ने उद्यमियों को विभागीय सहयोग का आश्वासन दिया।

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हुई विस्तृत चर्चा

बनारसी वस्त्रोद्योग संघ ने पीपीटी के माध्यम से पार्क के प्रारंभ की समय-सीमा, भूमि आवंटन का आकार, शेड की ऊंचाई, बहुमंजिला भवन की अनुमति, भुगतान की प्रक्रिया, रोजगार लक्ष्य, उच्च गति वाली मशीनों की अनुमति, जीएसटी व्यवस्था, सीएनजी उपलब्धता आदि के बारे में जानकारी दी। 

लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधि राजेश सिंह ने सिल्क स्टोरेज सुविधा और नकली धागे पर नियंत्रण का सुझाव दिया। सहकार भारती के प्रतिनिधि शैलेश सिंह ने पार्क में जरी उद्योग, अनुसंधान एवं विकास केंद्र और प्राकृतिक रेशों के उपयोग की अनुशंसा की। हिंदू बुनकर कल्याण समिति के मनोज कुमार ने कढ़ाई इकाई स्थापित करने का सुझाव दिया।

दिए कई सुझाव

बुनकर स्टूडियो के यासीन अंसारी ने सिल्क उत्पादों में पॉलीस्टर के उपयोग पर प्रतिबंध और केवल प्राकृतिक यार्न (लिनन/कॉटन) के उपयोग का सुझाव दिया। उन्होंने प्रिंटिंग और कढ़ाई को मूल्य संवर्धन परियोजनाओं में शामिल करने की अनुशंसा की। 

बनारसी वस्त्रोद्योग बुनकर संघ के राकेश कांत राय ने ज़िपर, बटन एवं संबद्ध उद्योगों को पार्क में शामिल करने, आवासीय व छात्रावास सुविधाएं, छोटे आकार की डाइंग इकाइयां और यार्न बैंक स्थापित करने की मांग की। होली वीव के उमंग ने हथकरघा एवं वस्त्र दोनों को समान प्राथमिकता देने और पार्क से सरकारी क्रय सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।
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रॉ मैटेरियल बैंक के साथ बनेगा यार्न बैंक : डीएम
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि वीडीए द्वारा अधिग्रहित जमीन पर रॉ मटेरियल बैंक और यार्न बैंक की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। निफ्ट और भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ रिसर्च एवं डेवलपमेंट का कार्य किया जाएगा। बुनकर सेवा केंद्र भी उसी परिसर में स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही जरी एवं इंब्राइडरी उद्योग की स्थापना की जाएगी। बनारसी साड़ी के लिए ऐसा प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाएगा, जहां उत्पादन और विपणन दोनों साथ-साथ हो।
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