बनारसी वस्त्रोद्योग संघ ने पीपीटी के माध्यम से पार्क के प्रारंभ की समय-सीमा, भूमि आवंटन का आकार, शेड की ऊंचाई, बहुमंजिला भवन की अनुमति, भुगतान की प्रक्रिया, रोजगार लक्ष्य, उच्च गति वाली मशीनों की अनुमति, जीएसटी व्यवस्था, सीएनजी उपलब्धता आदि के बारे में जानकारी दी।
लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधि राजेश सिंह ने सिल्क स्टोरेज सुविधा और नकली धागे पर नियंत्रण का सुझाव दिया। सहकार भारती के प्रतिनिधि शैलेश सिंह ने पार्क में जरी उद्योग, अनुसंधान एवं विकास केंद्र और प्राकृतिक रेशों के उपयोग की अनुशंसा की। हिंदू बुनकर कल्याण समिति के मनोज कुमार ने कढ़ाई इकाई स्थापित करने का सुझाव दिया।
बुनकर स्टूडियो के यासीन अंसारी ने सिल्क उत्पादों में पॉलीस्टर के उपयोग पर प्रतिबंध और केवल प्राकृतिक यार्न (लिनन/कॉटन) के उपयोग का सुझाव दिया। उन्होंने प्रिंटिंग और कढ़ाई को मूल्य संवर्धन परियोजनाओं में शामिल करने की अनुशंसा की।
बनारसी वस्त्रोद्योग बुनकर संघ के राकेश कांत राय ने ज़िपर, बटन एवं संबद्ध उद्योगों को पार्क में शामिल करने, आवासीय व छात्रावास सुविधाएं, छोटे आकार की डाइंग इकाइयां और यार्न बैंक स्थापित करने की मांग की। होली वीव के उमंग ने हथकरघा एवं वस्त्र दोनों को समान प्राथमिकता देने और पार्क से सरकारी क्रय सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।
रॉ मैटेरियल बैंक के साथ बनेगा यार्न बैंक : डीएम
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि वीडीए द्वारा अधिग्रहित जमीन पर रॉ मटेरियल बैंक और यार्न बैंक की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। निफ्ट और भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ रिसर्च एवं डेवलपमेंट का कार्य किया जाएगा। बुनकर सेवा केंद्र भी उसी परिसर में स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही जरी एवं इंब्राइडरी उद्योग की स्थापना की जाएगी। बनारसी साड़ी के लिए ऐसा प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाएगा, जहां उत्पादन और विपणन दोनों साथ-साथ हो।