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भारतीय संस्कृति के संवाहक हैं संस्कृत शास्त्र

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वाराणसी में गुवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर स्थित वाग्देवी मंदिर में आयोजित ?
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वाराणसी। संस्कृत शास्त्र भारतीय संस्कृति के संवाहक हैं, इसके माध्यम से हम राष्ट्रीयता और भारत, भारतीयता का भाव जन सामान्य में पूर्ण रूप से संचारित कर सकते हैं। शास्त्रार्थ की परंपरा से शास्त्रों के विभिन्न आयामों पर चर्चा के माध्यम से गूढ़ रहस्यों की जानकारी प्राप्त होती है। उक्त विचार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने व्यक्त किए। वह गुरुवार को वाग्देवी कंठ भरणम सभागार में अखिल भारतीय शास्त्रार्थ सभा को संबोधित कर रहे थे।
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कुलपति ने कहा कि काशी में प्रारंभ से ही विद्वान सभी शास्त्रों का अध्ययन अपने घरों में विद्यार्थियों को कराते थे, यह परंपरा आज भी विद्यमान है। विद्वत जन ब्रह्म मुहूर्त में विद्यार्थियों को शास्त्रों का अध्ययन कराते हैं, उन्हें शास्त्रार्थ परंपरा के लायक तैयार करते हैं। शास्त्रार्थ सभा में ईश्वर चैतन्य ने कहा कि प्रकाश का अभाव अंधकार है, अंधकार भाव रूप में नहीं हो सकता है। श्याम बिहारी ने कहा कि शास्त्र युक्तियों द्वारा भाव रूप सिद्ध किया गया है, यह श्याम रूप का भी प्रतीक है इसलिए अंधकार द्रव्य है। विद्वानों ने वेद, मीमांसा, व्याकरण, ज्योतिष, विशिष्टा द्वैत शास्त्र, वेदांत, न्याय शास्त्र और समुदय पर अपने मत रखे।
इस दौरान प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. सदानंद शुक्ल, प्रो. कमलाकांत त्रिपाठी, प्रो. महेंद्र पांडेय, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. बृजभूषण ओझा, डॉ. रामनारायण द्विवेदी, डॉ. रमाकांत पांडेय, डॉ. शत्रुघभन त्रिपाठी, डॉ. विनय कुमार पांडेय, ध्रुव सापकोटा, डॉ. धनंजय पांडेय ने विचार व्यक्त किए। शास्त्रार्थ सभा की शुरुआत मां वाग्देवी के पूजन और मंगलाचरण से हुआ।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए शास्त्रार्थ सभा का आयोजन हर माह किया जाएगा। वाग्देवी मंदिर परिसर में संस्कृत शास्त्र के ग्रंथाें का अध्ययन और अध्यापन की योजना बनाई गई है।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वाग्देवी मंदिर के प्रांगण में आयोजित शास्त्रार्थ सभा में विश्वविद्यालय के छात्र ही नदारद रहे। अवकाश का दिन होने के बाद भी विश्वविद्यालय के छात्रों की उपस्थित नहीं रही। हालांकि संस्कृत महाविद्यालयों के छात्र सभा में उपस्थित रहे।
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