वाराणसी। संकट मोचन संगीत समारोह में इस बार कई नए आयाम जुड़ गए हैं। संगीत रसिक यहां पहली बार लुप्त हो रहे वाद्य जलतरंग सुन सकेंगे। आठ अप्रैल से शुरू हो रहे इस छह दिनी संगीत समारोह में गुलाम अली की ठुमरियों और गजलेें तो सुनने को मिलेेंगी ही पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर और ड्रमर शिव मणि को भी सुनने का मौका मिलेगा।
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि महोत्सव की छह रातों में 80 से ज्यादा कलाकार 41 प्रस्तुतियां देंगे। शास्त्रीय संगीत के लिए ख्यात इस समारोह का दायरा और विस्तृत किया गया है। प्रतिदिन शाम सात से भोर चलने वाले आयोजन में अबकी हरिप्रसाद
चौरसिया, पं. जसराज और राजन-साजन मिश्र की शास्त्रीय गायकी होगी तो गुलाम अली गजल सुनाएंगे। कथक, ओडिसी के साथ-साथ काशी की रूपवाणी संस्था के कलाकार निराला की कृति ‘राम की शक्ति पूजा’ नृत्य नाटिका की प्रस्तुति करेंगे। डा. राजेश्वर आचार्य पहली बार जलतरंग की प्रस्तुति करेंगे। अबकी संगीत समारोह का पर्याय माने जाने वाले कंकना बनर्जी और सुनंदा पटनायक सरीखे कलाकार अबकी नहीं दिखेंगे।
संगीत महोत्सव के दिग्गज
पहली निशा-बिरजू महाराज (कथक), हरिप्रसाद चौरसिया (बांसुरी), अजय पोहनकर, पं. विश्वनाथ, गुलाम अली (गायन), अमजद अली खां (सरोद), अनुव्रत चटर्जी (तबला)
दूसरी निशा (नौ अप्रैल)- राम की शक्ति पूजा (नृत्य नाटिका), रतन शर्मा, अजय चक्रवर्ती, पं. जसराज (गायन), भवानी शंकर एवं फजल कुरैशी (पखावज, तबला युगलबंदी), विश्व मोहन भट्ट (मोहन वीणा)।
तीसरी निशा-मनीषा मिश्र (कथक), तेजेंद्र नारायण मजुमदार (सरोद), समीहन कसालकर, मनी प्रसाद (गायन), कुशल दास (सितार), येल्ला वेंकटराव (मृदंगम), हशमत अली, अकरम खां, जगराम खां (तबला ट्रायो)
चौथी निशा (11 अप्रैल)- रतिकांत, सुजाता महापात्र (ओडिसी), सतीश व्यास (संतूर), नीलाद्री कुमार (सितार), रोनू मजुमदार (बांसुरी), उल्हास कसालकर, सुरेश वाडेकर (गायन), सांवनी एवं सुरेश तलवरकर (तबला)
पांचवीं निशा- सोनल मान सिंह (ओडिसी), राजेश्वर आचार्य (जलतरंग), अनूप मिश्रा, राजन-साजन मिश्र (गायन), अतीश मुखोपाध्याय (सरोद), भजन सोपोरी (संतूर), नरेंद्र मिश्र, शुकदेव मिश्र, अतुल शंकर (युगलबंदी)
छठी शाम-माता प्रसाद एवम रविशंकर मिश्र (कथक), ऋषि एवमं वरुण मिश्र, संजय विद्यार्थी (गायन), यू राजेश, शिवा मणि (वादन), शुभेंद्र राव (सितार), संजू सहाय (तबला)