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संकटमोचन संगीत समारोह: प्रस्तुति के बीच में टूटा सरोद का तार, जोड़ने के बाद 35 मिनट तक चली प्रस्तुति

Sat, 11 Apr 2026 04:57 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

संकट मोचन संगीत समारोह के दौरान पद्मश्री पं. मजूमदार ने बताया कि अब तक 30 बार सरोद वादन में तार टूट चुका है। तापमान और नमी का इस पर फर्क पड़ता है।
 
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संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संकट मोचन संगीत समारोह के मंच पर महावीर की संगीत सेवा का एक ऐसा क्षण शुक्रवार को आया जब सरोद का एक तार ही टूट गया। प्रस्तुति अपने उफान पर थी कि पं. तेजेंद्र नारायण मजूमदार के सरोद की तार अलग हो गई लेकिन तबले पर पं. कुमार बोस की थाप नहीं रुकी। श्रोता कुछ समझ पाते तब तक पं. मजूमदार ने सरोद के तार को 30 सेकंड में जोड़ दिया और तबले संग हनुमान भक्ति की जुगलबंदी में दोबारा लीन हो गए। अगले 35 मिनट तक वादन का सिलसिला नहीं थमा और जुगलबंदी भी उफान पर पहुंच गई। जिसने भी टूटने और जुड़ने का यह नजारा देखा वह हैरान था। पद्मश्री से सम्मानित हो चुके पं. मजूमदार ने बताया कि अब तक 30 बार सरोद वादन में तार टूट चुका है। तापमान और नमी का इस पर फर्क पड़ता है।

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राग नंद से दो साल बाद लगाई हाजिरी
पं. मजूमदार ने संकट मोचन में दो साल के बाद महावीर के आंगन में राग नंद से हाजिरी लगाई। आलाप और जोड़ में स्वरों को विस्तार दिया। खनकदार आवाज प्राकृतिक और स्वाभाविक स्वरूप से थोड़ा हटकर रही। गत का यादबार वादन किया। विलंबित तीन ताल, मध्यलय झप ताल के बाद द्रुतलय तीन ताल में तबला पर बनारस घराने में पं. कुमार बोस ने कई बार माहौल अपने पक्ष में किया।

बिरजू महाराज के भाई ने 47 साल बाद किया कथक
पहली प्रस्तुति लखनऊ के कालका बिंदादीन घराने के कथक गुरु और पं. बिरजू महाराज के भाई पं. राममोहन महाराज की रही। नृत्य से पहले भावुक अंदाज में मंच पर आकर कहा कि बाबा के दरबार में इसे ही हाजिरी कहते हैं। इससे पहले 18 साल की उम्र में आया था और अब 65 की उम्र में। पं. राम मोहन ने नृत्य की शुरुआत बनारसी उठान से की। राधा-कृष्ण की रासलीला की प्रस्तुति तो एक बारगी श्रोताओं को बिरजू महाराज की याद आने लगी।
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पं. संजू सहाय के तबले ने इस प्रस्तुति को जीवंत कर दिया। दुगुन में एक से शुरू होकर 12 मात्राओं तक फिर चौगुन में नीचे की ओर गिरने का भाव दिखाकर श्रोताओं को अपना कायल बना दिया। मंच पर बैठकर डगर चलत देखो श्याम करत.. गायन पर बिंदादीन महाराज की ठुमरी लखनवी स्टाइल में प्रस्तुत की। गद्य नाटिकाओं के लेखक सहित पखावज और तबला वादक भी हैं। जाते-जाते पंडित राम मोहन ने संजू सहाय से कहा आज हनुमत दरबार में लखनऊ और लंदन की मुलाकात हो गई।

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