मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने कहा कि यह आयोजन केवल संगीत का मंच नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समावेश का प्रतीक है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि कम से कम एक ऐसा मंदिर जरूर रहना चाहिए, जहां सभी धर्मों और विचारों के लोगों को आने की स्वतंत्रता हो।
इस संगीत समारोह से पहले 2 से 5 अप्रैल तक मंदिर में हनुमान जंयती के अवसर पर भव्य रामायण सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान देश के विभिन्न शहरों से प्रसिद्ध रामायण मंडलियां और मानस वक्ता शामिल होंगे। सम्मेलन में अखिल ब्रह्माण्डनायक सीताराम महाराज सभापति के आसन को सुशोभित करेंगे।
2 अप्रैल को सुबह 6 से 9 बजे तक श्री हनुमान जी की विशेष पूजन-आरती और भव्य झांकी निकाली जाएगी। इसके बाद सुबह 9 बजे से श्रीरामचरितमानस का पूजन और एकाह पाठ प्रारंभ होगा। शाम को भजन-कीर्तन और रामायण मंडलियों द्वारा पूरी रात अखंड गान का आयोजन किया जाएगा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा।
वहीं 3 से 5 अप्रैल तक प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक केवल रामचरितमानस पर प्रवचन होंगे, जिसमें विद्वान वक्ता राम कथा का विस्तृत वर्णन करेंगे।
महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने सभी रामभक्तों और मानस प्रेमियों से अपील की है कि वे इस पावन आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और आध्यात्मिक लाभ के साथ सांस्कृतिक विरासत का आनंद उठाएं। यह आयोजन काशी की समृद्ध परंपरा, भक्ति और संगीत के अद्भुत संगम का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
छठवीं निशा (11 अप्रैल)
- ओडिसी: पं. रतिकांत महापात्रा और सुजाता महापात्रा
- सरोद: शिराज अली खां
- सितार: मेहताब अली नियाजी
- गायन: विदुषी कलापिनी कोमकली, पं. हरीश तिवारी, पं. साजन मिश्र
- सरोद: शिराज अली खां
- शतरंत्री वीणा: पं. अभय रुस्तम सोपोरी
यह समारोह रोज शाम 7:30 बजे से सूर्योदय तक संकट मोचन मंदिर के प्रांगण में आयोजित होगा।