पद्मभूषण पं. राजन मिश्र को समर्पित स्वरांजलि की द्वितीय संध्या भी यादगार रही। पं. राजन मिश्र के शिष्य गरुण का गायन और भांजे संजू सहाय का तबला वादन स्मृतिशेष को समर्पित रहा। ऑनलाइन और आफलाइन आयोजन में संगीत के रसिकजन दम साधे अंत तक मनमोहक प्रस्तुतियों का लुत्फ उठाते रहे।
सोमवार को भेलूपुर स्थित होटल के सभागार में आयोजित स्वरांजलि की दूसरी संध्या की शुरुआत पं. राजन मिश्र के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद प्रथम प्रस्तुति में पद्मभूषण पं. राजन-साजन मिश्र के शिष्य गरुण मिश्र ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। उन्होंने राग-बिहाग में विलंबित एक ताल में बाजे मोरी पायल तथा द्रुत तीन ताल में अबहूं लालन मैका... की बंदिशों से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इसके बाद भजन साधो ऐसा गुरु भावे... की प्रस्तुति से अपने गुरु को श्रद्धा सुमन अर्पित कर विराम दिया।
दूसरी प्रस्तुति में पंडित संजू सहाय के तबला वादन में विविधताओं ने श्रोताओं को अभिभूत किया। पंडित राजन मिश्र को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने अपनी प्रस्तुति को आरंभ किया। तीन ताल में बनारस की परंपरागत शैली में उठान, कायदा, रेला प्रस्तुत कर संगीत रसिकों का मन मोह लिया। उनके साथ हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र ने सधी संगत की। इस दौरान अभिजीत अग्रवाल, अशोक कपूर, डॉ. अनुराधा रतूड़ी, डॉ. आशीष जायसवाल आदि मौजूद रहे।