प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों 13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ धाम भक्तों को समर्पित होने के बाद आरएसएस इसे हिंदू समाज के लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में देश के सामने रखने की योजना में है। लोकार्पण के बाद एक महीने तक चलने वाले दिव्य काशी भव्य काशी अभियान को सामाजिक समरसता से जोड़ा जाएगा।
इसमें सभी समाज की सहभागिता के लिए संघ सभी जाति, संप्रदाय और वर्गों को इससे जोड़ने की मुहिम चलाएगा। सुदूर गांवों तक गंगा से काशी विश्वनाथ के मिलन के प्रचार के साथ जन-जन को काशी विश्वनाथ धाम से जोड़ने का अभियान चलेगा। इसमें खासकर अनुसूचित जाति व जनजातीय समाज के बीच सक्रिय संघ कार्यकर्ता हिंदू गौरव अभियान के जरिए उन्हें काशी तक लाएंगे।
एससी एसटी विचारक बताएंगे काशी से जुड़ाव
काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद मास पर्यंत चलने वाले कार्यक्रमों में अनुसूचित जाति व जनजाति समाज के प्रबुद्धजनों के लिए दो आयोजन किए जाएंगे। इसमें 20 व 21 दिसंबर को देश के प्रमुख एससी एसटी विचारकों की मौजूदगी में समरसता सम्मेलन होगा। इसमें काशी और काशी विश्वनाथ से एससी एसटी समाज से जुड़ाव का इतिहास बताएंगे। इसके बाद 30 व 31 दिसंबर को दलित इंडस्ट्रियल चैंबर ऑफ कामर्स का सम्मेलन होगा। इसमें देश के अनुसूचित जाति के उद्यमियों की इस ऐतिहासिक क्षण में अपनी सहभागिता की भी घोषणा कर सकते हैं।